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क्या आप जानते हैं नवरात्रि में किन दिनों का रंग कौनसा होता है?

क्या आप जानते हैं नवरात्रि में किन दिनों का रंग कौनसा होता है?

नवरात्रि कभी केवल व्रत और आराधना का समय रही है, तो कभी पारंपरिक वेशभूषा और लोक-संस्कृति का उत्सव भी बनकर उभरी है — और रंग इसी लोक-प्रथा का प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। कई परिवारों में नवरात्रि के प्रत्येक दिन के लिए एक विशिष्ट रंग तय होता है, जिसे पहनकर भक्त देवी के विशेष रूप को श्रद्धा से मनाते हैं। यह अभ्यास आधुनिक‑लोकधार्मिक संवेदना का मिश्रण है: कुछ जगहों पर रंगों को देवी के कार्यों (उदा. रक्षा, समृद्धि, ज्ञान) से जोड़ा जाता है, तो कहीं ग्रह‑नक्षत्र और पारंपरिक शैलियों का भी प्रभाव दिखाई देता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि रंग‑नियम पर कोई सार्वभौमिक शास्त्रबद्ध निर्देश नहीं है; यह अधिकतर पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा है। नीचे एक आम तौर पर प्रचलित रंग‑क्रम, इसके पास‑पास अर्थ और वैकल्पिक परंपरागत रूपों की संक्षिप्त व्याख्या दी जा रही है — ताकि आप अपने घर या मंदिर में सहजता से अपना चुनाव कर सकें।

सामान्यतः प्रचलित नवरात्रि‑रंग (दिनवार)

  • दिन 1 — पीला / केसरिया: पीला रंग स्फूर्ति, शिक्षा और नए आरम्भ का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों में देवी के प्रथम दिन को उत्साह और आशा से जोड़ा जाता है।
  • दिन 2 — हरा: हरा रंग विकास, प्रकृति और समृद्धि का संकेत है; यह दिन ऊर्जावान कर्म और वृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है।
  • दिन 3 — राखी/ग्रे या नारंगी: तीसरे दिन कुछ परंपराओं में राखी/ग्रे (निर्विकारता, संयम) और कुछ में नारंगी (ऊर्जा, उत्साह) पहनते हैं। यह स्थानीय विविधता का एक स्पष्ट उदाहरण है।
  • दिन 4 — नारंगी / केसर: उत्साह तथा उद्धार के भाव को निरूपित करने के लिए नारंगी को चुना जाता है; कुछ समुदायों में सफेद भी इस दिन पहनने का चलन है।
  • दिन 5 — सफेद: शुद्धता, शांति और भक्ति के लिए सफेद प्रचलित है; पवित्रता और आत्मशुद्धि की भावना इस दिन प्रमुख रहती है।
  • दिन 6 — लाल: शक्ति, साहस और सक्रियता का रंग—लाल—अक्सर माँ के योद्धा‑रूप को स्मरण कराता है।
  • दिन 7 — रॉयल ब्लू / गहरा नीला: स्थिरता, ध्यान और आध्यात्मिक गहराई के साथ यह रंग माँ के गंभीर और भक्तिपूर्ण पहलू को दर्शाता है।
  • दिन 8 — गुलाबी: करुणा, सौम्यता और सौन्दर्य का प्रतीक; कई जगहों पर नवरात्रि के अंतिम दिनों में प्रेमपूर्ण समर्पण और खुशहाली की कामना के साथ गुलाबी पहना जाता है।
  • दिन 9 — बैंगनी / श्रीवर्ण: बैंगनी या गहरे रंगों को समापन और दिव्य शक्ति के उच्चतम रूप के संकेत के रूप में देखा जाता है; यह विजय और पूर्णता का दिन होता है।

कहा से आया यह क्रम — और वैरायटी क्यों?

  • लोक‑परंपरा और आधुनिक व्यवहार: यह रंग‑क्रम आधुनिक‑लोकपरम्परागत अनुशासन से विकसित हुआ है, न कि किसी एक शास्त्र से अनिवार्य रूप से निर्धारित। कई घरों में यह माता‑पिता या सास‑ननद की परंपरा से आता है, और समय के साथ स्थानीय उत्सव‑संस्कृति ने इसे लोकप्रियता दी।
  • आध्यात्मिक व्याख्याएँ: कुछ व्याख्याएँ देवी के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, आदि) से रंगों का संबंध जोड़ती हैं; दैवीय गुण—ज्ञान, साहस, करुणा—का प्रतीकात्मक अनुवाद भी मिलता है। ये व्याख्याएँ अलग‑अलग सम्प्रदायों में भिन्न हो सकती हैं।
  • भौगोलिक भिन्नता: गुजरात, पश्चिमी भारत, पूर्वी (बंगाल) और दक्षिण भारत में अलग‑अलग रंगाभिन्यास मिलते हैं—कुछ जगहों पर तीसरे और चौथे दिन के रंग बदल जाते हैं, तो कहीं आठवें‑नौवें दिन के रंग अलग रखे जाते हैं।

तार्किक और व्यवहारिक सुझाव

  • यदि घर में कोई परंपरा है तो वही अनुसरण करें; परिवार का स्नातक‑अभ्यास सामाजिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को प्रबल करता है।
  • কिसी दिन के रंग को अनिवार्य न मानें—यदि कठिनाई हो तो रस्मी या अपने पसंदीदा शुभ रंग पहन लें।
  • यदि आप तीर्थ या मंदिर जाते हैं, वहाँ के आयोजकों द्वारा निर्धारित रंगों का सम्मान करना एक अच्छा साधन है।
  • चैत्र और शरद नवरात्रि में तिथियाँ चंद्ररीत (लूनर) होती हैं; नवरात्रि का प्रथम दिन शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। तिथियों की गणना हेतु स्थानीय पंचांग देखें—गणना के अनुसार दिन का रंग उसी तिथि के अनुसार लागू करें।

निष्कर्ष

नवरात्रि के रंग पारंपरिक पवित्रता और लोकसंस्कृति का सुंदर मिश्रण हैं। कोई भी रंग‑क्रम अपनाने का उद्देश्य श्रद्धा, आत्म‑संयम और देवी के प्रति भक्ति है; इसलिए कठोरता के बजाय समझ और लचीलापन बेहतर रहेगा। विभिन्न सम्प्रदाय और क्षेत्र अलग‑अलग तरीके से रंगों को अर्थ देते हैं—इसलिए यदि आप शास्त्रीय या स्थानीय व्याख्या खोज रहे हैं, तो अपने मंदिर‑पंडित या परिवार के बुजुर्गों से परामर्श करना उपयोगी रहेगा।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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