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वास्तु के अनुसार कैसे करें दिवाली की सजावट? घर में आएगी पॉजिटिव एनर्जी

वास्तु के अनुसार कैसे करें दिवाली की सजावट? घर में आएगी पॉजिटिव एनर्जी

दीवाली पर घर की सजावट केवल सुन्दर दिखने के लिए ही नहीं बल्कि पारंपरिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा, स्वागत और समृद्धि का संकेत भी मानी जाती है। वास्तुशास्त्र में घर के कोनों, दिशा-निर्देशों और प्रकाश के प्रबंधन को जीवन-ऊर्जा या प्राण प्रवाह से जोड़ा गया है; इसलिए त्योहार के समय की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पूजन-व्यवस्था का छोटा सा बदलाव पूरे वातावरण को बदल सकता है। यहाँ दी गई सजावट के उपाय समग्र रूप से सरल, व्यवहारिक और पारंपरिक सिद्धांतों पर आधारित हैं—परम्परागत वैरायटी मौजूद है, इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित या पंचांग सही वक्त के साथ मिलाकर लागू करें। नीचे दिए सुझावों का उद्देश्य वास्तु के सामान्य सिद्घांतों के अनुरूप घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना है, न कि पक्का भविष्य-वचन देना; विभिन्न स्कूलों (शैव, वैष्णव, शाक्त, स्मार्त) की परंपराएँ और स्थानीय रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं।

मुख्य सिद्धांत — प्रकाश, शुद्धता और खुला रास्ता

वास्तु के सामान्य निर्देशों के अनुरूप, दिवाली सजावट करते समय इन तीन बातों पर प्राथमिक ध्यान दें:

  • प्रकाश: प्रकाश अंधकार हटाता है और ऊर्जा को सक्रिय करता है—मुख्य द्वार, आंगन और पूजा क्षेत्र को अच्छी तरह प्रकाशित रखें।
  • शुद्धता: घर की सफाई, टूटी-फूटी चीजों की मरम्मत, और अव्यवस्था हटाना—ये सभी सकारात्मक ऊर्जा को आने देने में मदद करते हैं।
  • खुला रास्ता: मुख्य प्रवेश द्वार तक कम से कम अवरोध रखें—जूते, गुच्छे या भारी सामान रास्ता अवरुद्ध न करें।

दरवाजा और प्रवेश क्षेत्र की सजावट

द्वार वास्तु में एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि वह बाहर की दुनिया और घर के भीतर के बीच संपर्क बिंदु है।

  • मुख्य दरवाजे को साफ, रंगीन और रोशन रखें। छोटी सी रंगोली/रंगोलि बाहर के पारिवारिक स्वागत में लगाएँ—परम्परागत फूल, चावल-पीठ या हल्दी-बेसन का उपयोग कर सकते हैं।
  • दरवाजे पर छोटे-छोटे दीये या LED लाइट्स रखें—सुरक्षा के लिहाज से इलेक्ट्रिक लाइट्स का संयोजन उपयोगी होता है।
  • दरवाजे के पास किसी भी प्रकार के टूटे हुए सामान, जूते ढेर आदि न रखें।
  • यदि संभव हो तो दरवाजे के पास एक छोटा पौधा (वृक्षः तुलसी या अशोक जैसी) रखा जा सकता है—यह हवा और ऊर्जा को शुद्ध करने के रूप में देखा जाता है।

पूजा स्थल और मूर्ति-प्रतिमाएं

वास्तु परंपरा में पूजा-कक्ष या पूजा-कोना प्रमुख होता है। पारंपरिक सुझावों में अधिकांशतः पूजास्थल को घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) भाग में रखना शुभ माना जाता है; फिर भी घर की संरचना और पारिवारिक परंपरा निर्णायक होती है।

  • पूजास्थल: जहां संभव हो, उसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखें—यह सूक्ष्म ऊर्जा के आगमन के लिए अनुकूल माना जाता है।
  • प्रतिमाओं का सामना: कई घरों में देवी-देवताओं की प्रतिमा को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रखा जाता है। क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं—स्थानीय गुरु/पंडित की सलाह उपयोगी रहेगी।
  • साफ-सुथरे कपड़े और नियंत्रणित रोशनी रखें—मंद और स्थिर दीपक प्रयोग करें, झिलमिलाहट या बहुत जोरदार रोशनी से ध्यान भटक सकता है।
  • पात्रों में मिठाई, फलों और नैवेद्य की व्यवस्था स्वच्छ और समुचित रखें।

दीये, लाइटिंग और रंगोली — रंग, दिशा और सजगता

दीपावली का मूल भाव दीपक/प्रकाश से जुड़ा है। वास्तु में प्रकाश का उद्देश्य पूरे घर के ऊर्जा प्रवाह को सक्रिय करना है।

  • दीयों को प्रवेश, विंदु (कोनों) और पूजा क्षेत्र में रखें—विशेषकर उत्तर-पूर्व और उत्तर दिशा पर ध्यान दें।
  • दीयों का समूह पैटर्न में रखें ताकि प्रकाश समतल रूप से फैल सके—वास्तु सलाह देती है कि ऊर्जा अवरोध न हो।
  • रंगोली में हल्के रंग और प्राकृतिक सामग्री (चावल का आटा, फूल, रंगीन रेवड़ आदि) का प्रयोग करें—रासायनिक रंग कम रखें।
  • बड़ी लाइटिंग के लिए LED स्ट्रिप्स या लो-वोल्टेज लाइट्स का प्रयोग कर सकते हैं ताकि बिजली खर्च और सुरक्षा नियंत्रित रहे।

सामग्री, सामंजस्य और पर्यावरण-हितैषी विकल्प

दिवाली सजावट में प्रयुक्त सामग्री न केवल सजावट की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि घर की वाइब और स्वास्थ्य पर भी असर डालती है।

  • कागज़, प्लास्टिक और रासायनिक सजावट कम रखें—मिट्टी के दीये, फूलों की मालाएँ और सूखे फूलों की सजावट पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हैं।
  • यदि मोमबत्तियाँ या रासायनिक कन्फेटी का उपयोग कर रहे हैं तो वेंटिलेशन का ध्यान रखें और ज्वलनशील सामग्री से दूर रखें।
  • धूप-बत्ती का प्रयोग संयम से करें—कुछ परिवार धूप से ऊर्जा शुद्धता का प्रतीक देखते हैं; अन्य परंपराएँ अलग कर सकती हैं।

सुरक्षा, मरम्मत और व्यवस्थित स्थान

सौंदर्य के साथ सुरक्षा और व्यवस्थित व्यवस्था भी आवश्यक है—विशेषकर आग, बिजली और आकस्मिक चोट से बचाव के लिए।

  • इलेक्ट्रिक लाइट्स का टेस्ट पहले ही कर लें—छलने वाले केबल, ढीले सॉकेट और ओवरलोडिंग से बचें।
  • दीयों को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ किड्स और पालतू जानवर आसानी से न पहुँच पायें।
  • टूटी-फूटी चीजें, दरवाजे की मरम्मत और खिड़कियों का तेल-ग्रिज़ पहले कर लें ताकि त्योहार के दौरान व्यवधान न हो।

मुहूर्त, स्थानीय परंपरा और व्यावहारिक सलाह

परंपरागत रूप से दीवाली, कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है; लक्ष्मी पूजा का सटीक मुहूर्त हर वर्ष पंचांग में अलग होता है। वास्तु उपायों को अपनाने से पहले अपने पारिवारिक रीति-रिवाज और स्थानीय पंडित की सलाह लेना उपयुक्त रहेगा। याद रखें कि वास्तु एक मार्गदर्शक है—इसे अंध विश्वास की तरह नहीं, बल्कि प्रायोगिक और विवेकी दृष्टि से देखें।

अंतिम बात: दीवाली की सजावट का मूल उद्देश्य घर में साफ-सफाई, प्रकाश और स्वागत की भावना बढाना है। वास्तु के सुलभ सिद्धांतों को अपनाकर आप न केवल घर को सुंदर बना सकते हैं बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक रूप से भी सकारात्मक माहौल तैयार कर सकते हैं। अपने परिवार की परंपरा, सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखकर सजावट करें—ऐसा करने पर दिवाली का आनंद और अर्थ दोनों बढ़ते हैं।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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