Hindi Blogs, Navaratri

क्या आप जानते हैं स्कंदमाता के प्रिय पुष्प कौनसे हैं?

क्या आप जानते हैं स्कंदमाता के प्रिय पुष्प कौनसे हैं?

माँ स्कंदमाता — नवरात्रि की पांचवीं देवी के रूप में जानी जाती हैं — अपने शिशु स्कंद (कार्तिकेय) के साथ किसी भी माँ से कम नहीं। पूजा-अर्चना में पुष्प अर्पण केवल सजावट नहीं होते; वे देवी के गुणों, रंग-आकांक्षाओं और लोक-परंपराओं का प्रतीक भी बनते हैं। कई भक्त सवाल करते हैं: “क्या आप जानते हैं स्कंदमाता के प्रिय पुष्प कौनसे हैं?” इसका एक सरल उत्तर नहीं है क्योंकि देवा-अर्चना के नियम और प्रथाएँ क्षेत्र, पंथ और ग्रंथों के अनुसार बदलती हैं। फिर भी मंदिर-रीतियों, छवियों (इकोनोग्राफी) और लोक-संस्कृति का अध्ययन करके हम कुछ पुष्पों के बार-बार प्रचलित होने का कारण समझ सकते हैं। नीचे दिए गए विवेचन में मैं उपलब्ध स्रोतों, लोक-परम्पराओं और पूजा व्यवहार पर आधारित संक्षिप्त लेकिन गहन जानकारी दे रहा/रही हूँ — साथ ही बताता/बताती हूँ कि कब और क्यों कौन सा पुष्प उपयुक्त माना जाता है।

स्कंदमाता: एक संक्षेपिक परिचय

स्कंदमाता देवी पार्वती के उस रूप से जुड़ी हैं जिनका वरदान पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) के लिए विशेष है। आइकॉनोग्राफी में उन्हें नवपलित हस्त में स्कंद को धारण करते हुए, कमल के आसन पर विराजमान दिखाया जाता है। इस माँ का स्वरूप अपनी मातृत्व-ऊर्जा और रण कौशल दोनों के संकेत देता है—यही कारण है कि उनकी आराधना में न केवल शक्ति-प्रतीक बल्कि शुद्धता और समृद्धि के प्रतीक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

मुख्य पुष्प और उनके तर्क

  • कमल (पद्म/कमल) — स्कंदमाता को अक्सर कमल पर विराजमान दिखाया जाता है, इसलिए कमल की महत्ता स्पष्ट है। कमल शुद्धता, अधिभौतिक उन्नयन और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। कई पंडित और पूजा-पद्धतियाँ बताती हैं कि यदि प्रतिमा या चित्र में देवी कमल पर बैठी हों तो कमल अर्पित करना सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
  • गुड़हल/हिबिस्कस (जुहु/गुड़हल) — शाक्त परंपरा में देवी के लिए लाल रंग का विशेष महत्व है। लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है और अनेक मंदिरों में माँ दुर्गा के समर्पित पुष्प के रूप में देखा जाता है। लोक-आराधना में गुड़हल को जीवन-शक्ति और माँ के रणरूप पहलू की अभिव्यक्ति माना जाता है।
  • गेंदा (मारिगोल्ड) — उपलब्धता और रंगत के कारण उत्तर व पश्चिम भारत की कई परंपराओं में गेंदा आमतौर पर देवालयों और घरों में अर्पित किया जाता है। यह उत्सव-गुण और समृद्धि का संकेत देता है, और झाकी/माला बनाने में सुविधाजनक भी होता है।
  • मोहर/चमेली/मोगरा (सुगंधित पुष्प) — शुद्धता और स्त्रीत्व के साथ जुड़ी सुगंध भी पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है। सुबह की आराधना या घरेलू विधि में सुगंधित छोटे पुष्प जैसे मोगरा, चमेली अर्पित किए जाते हैं। ये मां के कोमल, मातृत्व-गुणों को रेखांकित करते हैं।
  • चम्पा/प्लूमेरिया — दक्षिण भारत में माता की अनेक छवियाँ चम्पा के साथ जुड़ी मिलीं। यह पुष्प शांति और दिव्यता का भाव लाता है, और मातृत्व-संप्रेषण के अनुकूल माना जाता है।

कौन सा पुष्प कब चुनें — प्रायोगिक सुझाव

  • नवरात्रि के पंचमी (पाँचवे दिन) — परंपरा के अनुसार नवरात्रि की पंचमी को स्कंदमाता की आराधना होती है। यदि आपने मूर्ति या तस्वीर के समक्ष कमल की व्यवस्था कर सकते हैं तो कमल प्राथमिक हो; उपलब्ध न होने पर लाल गुड़हल या ताज़ा गेंदा भी उपयुक्त हैं।
  • स्थानीय परंपरा का पालन करें — कुछ मंदिरों और परिवारों की प्राचीन परंपरा होती है (उदा. बंगाल में दुर्गा पूजा में लाल पुष्पों का अधिक प्रयोग; दक्षिण में कमल-मंडन)। जहां तक संभव हो स्थानीय पुरोहित/पंडित की सलाह लें।
  • ताज़ा और पवित्र पुष्प — कोई भी पुष्प दें तो वह ताज़ा और साफ़ हो; मुरझाए फूल अर्पण न करें।
  • गंध का महत्व — यदि आप माँ के कोमल रूप पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं तो सुगंधित पुष्प (मोगरा/चमेली) अर्पण करना उपयुक्त रहेगा।

ग्रंथ और स्थानीय विविधताएँ — क्या कहते हैं स्रोत?

देवी-अर्चना के बारे में प्राचीन ग्रंथों में कई विस्तृत अनुष्ठान-विधियाँ मिलती हैं पर हर रूप के लिए सटीक पुष्प-निर्देशन सार्वभौमिक रूप से दर्ज नहीं है। कुछ शास्त्रीय और तान्त्रिक ग्रंथों में देवी के लिए लाल व गुलाबी रंग के पुष्पों का सामान्य आदेश मिलता है, जबकि अर्ध-लोक परंपराएँ (मंदिर पद्धति, क्षेत्रीय पूजा) स्वयं के अनुभव और उपलब्धता के आधार पर पुष्प तय कर लेते हैं। इसलिए बेहतर यह है कि हम ग्रंथों के सामान्य सिद्धांत (रंग, शुद्धता, प्रतीक) को समझें और स्थानीय रीति-रिवाज के साथ सामंजस्य बैठाएँ।

संक्षेप में — क्या प्राथमिकता दें?

  • सबसे उपयुक्त: कमल (यदि प्रतिमा/चित्र में कमल का संकेत हो)
  • सामान्य और पारंपरिक विकल्प: लाल गुड़हल (हिबिस्कस), गेंदा
  • सुगंध/मातृत्व-सम्मत विकल्प: मोगरा, चमेली, चम्पा

अंत में, पुष्प केवल भौतिक अर्पण हैं; उनकी ऊर्जा और अर्थ तब उपयुक्त बनती है जब अर्पक का मन शुद्ध, निष्ठापूर्ण और विनम्र हो। विभिन्न क्षेत्री य परम्पराएँ अलग-अलग पुष्पों को प्रिय मानती हैं — इसलिए स्कंदमाता के प्रिय पुष्प का सर्वोच्च उत्तर “वह पुष्प जो श्रद्धा और उपासना के साथ अर्पित किया जाए” ही रहेगा।

author-avatar

About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *