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Diwali Puja Vidhi 2025: घर पर ऐसे करें दिवाली की पूजा, जानें कलश स्थापना से आरती तक की पूरी प्रक्रिया, पंडित जी ने बताए नियम

Diwali Puja Vidhi 2025: घर पर ऐसे करें दिवाली की पूजा, जानें कलश स्थापना से आरती तक की पूरी प्रक्रिया, पंडित जी ने बताए नियम

दिवाली पूजा का भाव साधारणतः घर एवं हृदय की साफ‑सफाई, देवी‑देवताओं का स्वागत और परिवार के लिए समृद्धि की प्रार्थना है। पारंपरिक रूप से लक्ष्मी‑पूजन कार्तिक अमावस्या की रात या द्वापरप्रारंभ के समय किया जाता है; पंडितों से मुहूर्त पूछना उपयुक्त रहेगा क्योंकि स्थान और कर्त्तव्यों के अनुसार समय बदल सकता है। इस लेख में हम सरल, घरेलू और शास्त्रीय रूप से स्वीकार्य तरीके से दिवाली पूजा की पूरी विधि—साफ‑सफाई, कलश स्थापना, संकल्प, गणेश‑लक्ष्मी‑कुबेर अराधना, दीप‑आरती और समापन—व्यवस्थित रूप में दे रहे हैं। परमपरागत भेद और स्थानीय परंपराओं की अपेक्षा करते हुए, यहाँ दी हुई विधि को आप अपने घर की रीति और पंडित जी की सूचनाओं के अनुरूप समायोजित कर सकते हैं। सुरक्षा, पर्यावरण और स्वास्थ्य सम्बन्धी सावधानियों का भी ध्यान रखें—खुले तेल के दीयों का उपयोग, भोजन‑प्रसाद की स्वच्छता और प्राकृतिक प्रसाद की प्राथमिकता शुभ होती है।

सामग्री और प्रारम्भिक तैयारी

  • पूजा स्थान: घर का स्वच्छ और साफ‑सुत्रा कोना, उत्तर‑पूर्व (ईशान) प्रायः शुभ माना जाता है।
  • आवश्यक वस्तुएँ: कलश (तांबे/ब्रास/मृत्तिका), जल, पाँच आम के पत्ते, नारियल, हल्दी‑कुमकुम, अक्षत (कच्चा चावल), दीप (घी/तेल), अगरबत्ती, फुल (लाल चन्दन/गुलाब आदि), फल‑मिठाई, पावन वस्त्र और थाल।
  • प्रतिमाएँ/चित्र: देवी लक्ष्मी, श्री गणेश और (यदि परम्परा में हो) कुबेर की छोटी मूर्ति या तस्वीर।
  • वैकल्पिक: धनरक्षा‑नोट, सिक्के, नैवेद्य के लिए हल्का भोजन/मिठाई, दीपक रखने का सुरक्षित स्टैंड।

कलश स्थापना — चरण दर चरण

  • 1) स्थान की शुद्धि: स्थान को झाड़ू‑पोंछ कर और साफ कपड़े बिछाकर शुरू करें; घर के सदस्य हाथ‑पैर धोकर उपस्थित हों।
  • 2) कलश लाना: कलश में स्वच्छ जल भरें। कुछ परंपराओं में गंगाजल या उत्पन्न जल मिलाने की इच्छा होती है।
  • 3) अक्षत और तिल: कलश के अंदर थोड़े अक्षत और तिल डालना शुभ माना जाता है—यह स्थानीय रीति पर निर्भर कर सकता है।
  • 4) पत्ते और नारियल: कलश के मुंह पर उल्टा रखा नारियल एवं चारो ओर पाँच‑पांच आम के पत्ते रखें; नारियल पर हल्दी‑कुमकुम लगाएं और लाल कपड़ा बाँधें।
  • 5) कलश पर डैकोरेशन: कलश के ऊपर मांगलिक धागा (कलावा), सिक्का या अक्षता की माला रखी जा सकती है।
  • 6) कलश की दिशा: कलश को पूजा स्थल में देवी‑दायि दिशा की ओर रखें; कई ग्रंथों के अनुसार केंद्रीय स्थान पर रखना भी उत्तम है।

संकल्प, मंत्र और पूजा क्रम

  • संकल्प: परिवार के मुखिया अथवा जो पूजा कर रहा है वह संकल्प बोले—उदाहरण: “स्वे/हम् इदं दिवाळी‑पूजनम् कुर्वामः। सर्वैः पारिवारिकैः समृद्धि, आरोग्य व शान्ति अभिलष्यते।” पारंपरिक संस्कृत संकल्प पंडित जी बताएंगे—संप्रदाय अनुसार भिन्नता रहती है।
  • गणेश‑पूजन: सामान्य रूप से पूजा गणेश‑अवतीर्ण से प्रारम्भ होती है—ॐ गं गणपतये नमः। फूल, दूर्वा और मोदक/प्रसाद अर्पित करें।
  • लक्ष्मी‑पूजन: देवी लक्ष्मी के सामने कलश और मूर्ति/चित्र रखें। फूल, अक्षत, रोली‑मंजि, नैवेद्य, दीप और धूप अर्पित करें। सरल मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”—इसे 11, 21 या 108 बार जपना पारंपरिक है; परंतु समय के अनुसार 11 या 21 बार भी पर्याप्त है।
  • कुबेर‑पूजन (वैकल्पिक): कुछ परिवारों में कुबेर को निमंत्रण देकर धन सुख की कामना की जाती है; उसके लिए छोटे सिक्के और विशेष मंत्रों का प्रयोग होता है।
  • आरती और भजन: दीपक जलाकर आरती करें—पहले गणेश, फिर लक्ष्मी की आरती पारंपरिक क्रम है। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण करें।

दीप/आरती और समापन

  • दीप जलाने का समय: प्रायः सूर्यास्त के बाद, प्रातः सेश नहीं जबकि लक्ष्मीपूजन की रात में शाम‑समय। स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ मुहूर्त का पालन करें।
  • दीपक की संख्या: पारंपरिक रूप से दीयों की संख्या पर विशेष नियम प्रचलित हैं; सामान्य घरेलू पूजा में 1, 3 या 7 दीये लगाए जाते हैं।
  • आरती के बाद: अंत में परिवार का प्रणाम, प्रसाद वितरण और कुछ समय ध्यान/प्रार्थना (मौन या मंत्र) रखें। संकल्प का उल्लेख कर ध्यान स्थिरीकरण रखें।

सावधानियाँ और वैकल्पिक परंपराएँ

  • आग‑सुरक्षा: खुली आग और ज्वलनशील वस्तुएँ दूर रखें; छोटे बच्चों को दीयों के पास न बैठाएं।
  • पर्यावरण: फूल‑पोष्य और biodegradable सामग्री का प्रयोग प्राथमिक रखें; प्रयोग में आए वस्तुओं का नदी में विसर्जन करने के बजाय घर पर ही सुरक्षित निपटान करें।
  • आहार और स्वास्थ्य: प्रसाद स्वच्छता से बनाएं; शाकाहारी या परम्परानुसार प्रसाद रखें।
  • समुदाय और समावेशिता: कुछ परम्पराओं में पड़ोसियों के साथ सामूहिक पूजा/दीपदान होता है—यह सामाजिक बंधन मजबूत करने का अवसर है।
  • संप्रदायिक भिन्नता: शैव, वैष्णव, शाक्त आदि परम्पराओं में मंत्र, संकल्प और पूजा क्रम में भेद होंगे—पंडित जी या अपने गुरु‑परंपरा की सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (संक्षेप)

  • क्या घर पर सामान्य पूजा पर्याप्त है? हाँ—यदि नियमों का ध्यान रखते हुए श्रद्धा से पूजा की जाये तो घर पर साधारण विधि से भी पूजा विधिपूर्वक मानी जाती है।
  • कितने समय तक जप करें? 11/21/108 का विकल्प सामान्य है; समय या क्षमता के अनुसार चयन करें।
  • कलश मिट्टी का रखें या धातु का? दोनों स्वीकार्य हैं; पारंपरिक रूप से तांबा/मृत्तिका उपयोग में आते हैं, पर स्वच्छता और स्थायित्व देखें।

अंत में, पूजा का मूल उद्देश्य मन का शुद्धिकरण और पारिवारिक कल्याण की कामना है। शास्त्रीय नियमों का सम्मान करते हुए भी स्थानीय परंपरा, साध्य समय और सुरक्षा‑आधार पर अपनी पूजा को व्यवस्थित करें। यदि आप विस्तृत मुहूर्त और संस्कृत संकल्प चाहते हैं तो अपने पारिवारिक पंडित या पंचांग‑कार से परामर्श लें—क्योंकि मुहूर्त, तिथि और स्थानानुरूप विधियाँ बदलती हैं। शुभ दीपावली।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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