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Diwali Decoration 2025: घर के मुख्य द्वार पर जरूर लगाएं ये 4 चीजें, मां लक्ष्मी का होगा आगमन, घर में आएगी सुख-समृद्धि

Diwali Decoration 2025: घर के मुख्य द्वार पर जरूर लगाएं ये 4 चीजें, मां लक्ष्मी का होगा आगमन, घर में आएगी सुख-समृद्धि

दीपावली, विशेषकर माँ लक्ष्मी की पूजा वाली रात, पारंपरिक रूप से कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर मनाई जाती है। घर का मुख्य द्वार उस समय सिर्फ प्रवेश‑स्थान नहीं बल्कि आस्था, स्वच्छता और स्वागत का प्रतीक बन जाता है—यहां की सजावट से यह संकेत जाता है कि घर में वैभव, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा आने की इच्छा है। विभिन्न संस्कारों और क्षेत्रीय परंपराओं में साधन और मतलब अलग हो सकते हैं: कुछ परिवारों में तोरण और रंगोली पर ज़ोर रहता है, कुछ में कलश‑स्थापन की प्राचीन परंपरा। नीचे दिए गए चार आइटम आसान, पारंपरिक और अर्थपूर्ण हैं; इन्हें लगाने के साथ आप परंपरा की मनोवैज्ञानिक और सामुदायिक परतों को भी कायम करते हैं। मैं हर वस्तु के साथ प्रायोगिक सलाह, पारंपरिक संदर्भ और वैकल्पिक, पर्यावरण‑अनुकूल सुझाव दे रहा/रही हूँ ताकि आप अपनी पारिवारिक परंपरा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था कर सकें।

1) तोरण / बंदनवार (आम के पत्ते और फूल)
क्यों: तोरण का उपयोग घर के द्वार पर प्राचीन काल से शुभ‑स्वागत के लिए होता आया है। लोक प्रथाओं और गृह्य‑कर्मों में तोरण को अपमान एवं नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और देवी‑देवताओं का आमंत्रण मानते हैं।

  • कैसे बनाएं/लगे: नए आम के पत्ते और फूल (गेंदा/गुलाब/मोगरा) से ताज़ा तोरण लगाना शुभ माना जाता है। अगर ताज़ा पत्ते उपलब्ध न हों तो सूखे पुष्प‑स्टिंग या कपड़े का पारंपरिक तोरण भी उपयोगी है।
  • विवरण: तोरण को ऊँचाई पर, मुख्य दरवाज़े की ऊपर की तरफ़ या दोनों किनारों पर बाँधा जा सकता है ताकि आने‑जाने वाले पर स्वागत का भाव पहले ही प्रभाव डाले।
  • पर्यावरण‑सुझाव: प्लास्टिक न प्रयोग करें; बायोडिग्रेडेबल मटेरियल चुनें जिससे उत्सव के बाद कूड़ा कम बने।

2) रंगोली/कोलम और माँ लक्ष्मी के पदचिन्ह (अक्षत/कुंकुम के साथ)
क्यों: रंगोली या कोलम द्वार पर ढेर‑सारी शुभता और सौहार्द का प्रतीक है। दक्षिण भारत में कोलम, पश्चिम और उत्तर में रंगोली—दोनों में लक्ष्मी के पदचिन्ह बनाकर देवी के आगमन का संकेत दिया जाता है।

  • कैसे बनाएं: चावल के आटे/सूखे फूल/हल्दी‑कुंकुम का प्रयोग कर सरल आकृति बनाएं। बीच में माँ लक्ष्मी के छोटे‑छोटे पदचिन्ह (दो चरण‑नक़्श) बनाकर अक्षत (अंकुरित चावल नहीं, परंतु पकाने से पहले के चावल) और सिंदूर रखें।
  • पारंपरिक संदर्भ: लोक मान्यताओं में चावल और अक्षत समृद्धि के प्रतीक हैं; पादचिन्ह देवी के आगमन का सूचक। कुछ परिवारों में कोलम सुबह‑सुबह ही बनाना शुभ माना जाता है, जबकि दीपावली पर सजाना विशेष महत्व रखता है।
  • सुरक्षा/स्थायित्व: बाहर के रुख पर हल्की बारिश का ध्यान रखें—फूलों के विकल्प चुनें या छोटे प्लास्टिक‑ट्रे का उपयोग कर अंदर की तरफ रखें।

3) श्री कलश (नारियल और आम के पत्ते सहित) द्वार के पास
क्यों: कलश को शास्त्रों और तान्त्रिक परंपरा में समृद्धि और देवी का आवास माना जाता है। शाक्त परंपरा में विशेषतः कलश को देवी का प्रतिनिधि समझ कर आदर से स्थापित किया जाता है; स्मार्तों में भी कलश शुभता का संकेत है।

  • कैसे रखें: एक स्वच्छ बर्तन (तांबे/कांच/मिट्टी) में जल भरकर ऊपर नारियल रखें और उसके चारों ओर आम के पत्ते लगाएं। इसे मुख्य द्वार के आसपास, परंतु मार्ग में बाधा न बने—दरवाज़े के दाहिने या बाएं कोने में रखा जा सकता है।
  • न्यायसंगत विधि: कलश स्थापना करते समय ghar‑pujari या परिवार की परंपरा के अनुसार सरल आह्वान/मंत्र किया जा सकता है—उदाहरण के लिए कुछ परिवार श्री सूक्त/लक्ष्मी‑स्टोत्र का पाठ करते हैं।
  • विविधताएँ: यदि पानी और नारियल उपलब्ध न हों तो प्रतीकात्मक कलश (चित्र/लघु प्रतिमा) भी रखें; शुद्ध मन का महत्व शास्त्रीय लेखों में अधिक है।

4) दीप/दीपमाला के साथ समृद्धि बर्तन (अन्न/सिक्के या छोटा धनपात्र)
क्यों: दीप का प्रकाश अज्ञान परज्ञान का प्रतीक है और दीपावली में माँ लक्ष्मी को रोशन घर पसंद है। साथ में रखा छोटा बर्तन अनाज या कुछ सिक्के समृद्धि व ऐश्वर्य का संकेत देता है—यह गृहस्थ जीवन में आहार‑धन की निरन्तरता एवं आशीर्वाद का प्रतिक है।

  • कैसे सजाएं: मुख्य द्वार के समीप स्थिर सतह पर एक साफ‑चौकी रखें, उस पर दीपों की पंक्ति लगाएं और बीच में एक छोटा प्याला जिसमें चावल, गेहूँ या कुछ चांदी/सिक्के रखें। दीप तेल या दिए में घी प्रयोग करने वाले घर पारंपरिक रूप से करते हैं; यदि घर में बच्चे/पेट्स हैं तो छोटे इलेक्ट्रिक दीयों/एलईडी दीपों का उपयोग सुरक्षा दृष्टि से बेहतर है।
  • मंत्र/भाव: दीप जलाते समय शांत मन से “ॐ लक्ष्म्यै नमः” या “ॐ श्रीं” जैसे संक्षिप्त आह्वान कहा जा सकता है; कई परिवारों में गणेश‑पूजा पहले की जाती है, इसलिए सम्मिलित “ॐ गणेशाय नमः” श्रेयस्कर है।
  • सुरक्षा: खुले ज्वाला से सावधानी बरतें—कपड़े या कागज़ से दूरी रखें तथा दीयों को स्थिर प्लेट पर रखें।

छोटी‑छोटी परंपरागत क्रियाओं के अलावा ध्यान दें कि आत्मा‑शुद्धि और व्यवथा का भी महत्व है: दरवाज़े के पास सफाई, साफ चटाई/जूते रखने की जगह, और स्वागत का भावत्व वृद्धि करते हैं। विभिन्न समुदायों में कुछ भेद होंगे—उदाहरणतः वैष्णव परंपराओं में रंगों और नारियल के प्रयोग पर अलग शैलियाँ मिलेंगी; शाक्त परंपराओं में कलश की भूमिका अधिक तीव्र होगी। यह भी स्वीकारनीय है कि धार्मिक अनुभव व्यक्तिगत और सांस्कृतिक होता है—आप अपनी पारिवारिक परंपरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के अनुरूप इन सुझावों को अपनाएँ।

अंत में, लक्ष्मी‑आगमन का उद्देश्य केवल भौतिक धन नहीं बल्कि घर में शान्ति, सद्भाव और नैतिक संपन्नता भी है। इसलिए सजावट के साथ साधारण मनोस्थिति—सञ्‍चालन, दान‑सहायता और पारिवारिक मेल—भी बनाए रखें। पूजा‑विधि में संशोधन करना स्वीकार्य है; परंपरा का सार, सम्मान और सतर्कता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। शुभ दीपावली।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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