Narak Chaturdashi 2025: नरक चतुर्दशी पर हनुमान जयंती का संयोग, इन 3 राशियों के कटेंगे सारे संकट, बनेंगे बिगड़े काम
नरक चतुर्दशी और हनुमान जयंती का एक साथ आना—यदि 2025 में ऐसा संयोग बना है तो यह धार्मिक और सामाजिक दोनों मायनों में ध्यान देने योग्य है। नरक चतुर्दशी दीपावली से एक दिन पहले आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है, जिसे अंधकार, पाप और भय के विनाश के रूपक के रूप में देखा जाता है; वहीं हनुमान जयंती भक्ति, साहस और संकट से पार पाने का उत्सव है। इन दोनों पर्वों का मेल शाब्दिक और रूपक दोनों स्तरों पर ‘बुराई पर विजय’ का संदेश और भी ऊँचा कर देता है। इस लेख में हम पारंपरिक पुराणकथाओं और तिथिगत पटल को संक्षेप में देखेंगे, विभिन्न सम्प्रदायों की व्याख्याओं का उल्लेख करेंगे, और उस ज्योतिषीय आधार को समझने की कोशिश करेंगे जिसके कारण तीन विशिष्ट राशियाँ इस संयोग से राहत और प्रगतिशील बदलाव की संभावना पाती दिख रही हैं। साथ ही उन अनुष्ठानिक व व्यवहारिक उपायों की सूची दी जाएगी जिन्हें श्रद्धालु अपनाकर इस दिन का अधिक सार्थक उपयोग कर सकते हैं।
नरक चतुर्दशी — पौराणिक पृष्ठभूमि और तिथि-सूचना
पौराणिक परम्परा में नरक चतुर्दशी का संबंध नरकासुर वध से जोड़ा जाता है; कुछ पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार भगवान कृष्ण तथा उनकी पत्नी सुंदरद्रा ने नरकासुर का संहार कर संसार से अत्याचार मिटाया था। धार्मिक व्यवहार में यह दिन व्यक्तिगत रूप से अंदरूनी अंधकार (अहं, लोभ, क्रोध) के विनाश के साथ जोड़ा जाता है। पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी होती है—स्थानीय काल गणना (समय, स्थान, ग्रह-स्थिति) के आधार पर तिथियों में एक-दो घंटे का भेद हो सकता है, इसलिए घरेलू पूजा या नहाने-धोने के उपक्रमों के लिए अपने नज़दीकी पञ्चांग/मंदिर से समय निश्चित करना बुद्धिमानी है।
हनुमान जयंती — विविध मान्यताएँ और तिथिगत अंतर
हनुमान जयंती की तिथि को लेकर भिन्न-संकल्पनाएँ मौजूद हैं: उत्तरी भारत में सामान्यतः इसे चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जबकि कुछ दक्षिणी और अन्य प्रादेशिक परम्पराओं में यह दूसरे महीनों में आती है। हनुमान को वायु प्रभु का पुत्र, रामभक्ति का आदर्श और संकटों में सहायता देने वाला देवता माना जाता है—रामायण और अन्य ग्रंथों में हनुमान के कई गुणों का उल्लेख मिलता है। इसलिए यदि किसी वर्ष नरक चतुर्दशी के साथ हनुमान जयंती का संयोग बनता है, तो वह अनूठा धार्मिक संतुलन प्रस्तुत करता है: नाशकारी पक्ष (अंधकार/पाप) और उद्धारक शक्ति (भक्ति/शक्ति) दोनों एक साथ उपस्थित रहती हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि: किन तीन राशियों को लाभ होने की संभावना बताई जा रही है
स्थिर वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं; परन्तु पारम्परिक वैदिक ज्योतिष और आधुनिक पारंपरिक विचारों के आधार पर कुछ ज्योतिषी इस संयोग को निम्न तीन राशियों के लिये शुभ मान रहे हैं—यह समझाते हुए कि यह “लाभ” स्थितिगत और व्यक्तिगत कुण्डली पर निर्भर करेगा:
- मेष (Aries) — मेष पर मंगल का प्रभाव प्रबल होता है। हनुमान को प्रायः शक्ति, साहस और सक्रियता से जोड़ा जाता है; नरक चतुर्दशी पर दोषों का ह्रास व हनुमान स्तुति के संयोजन से मेष राशि के लोग परिश्रम के फलों में त्वरित राहत महसूस कर सकते हैं।
- सिंह (Leo) — सिंह राशि सूर्य से जुड़ी है। हनुमान की रामभक्ति व आदर्श नेतृत्व गुणों का प्रभाव, और त्याग व आत्मशुद्धि के संकेतों से यह राशि सामाजिक व आत्म-संबंधी परेशानियों में सकारात्मक मोड़ पा सकती है।
- धनु (Sagittarius) — धनु को गुरू के कारक ग्रह से जुड़ा माना जाता है; अध्यात्मिक उद्धार व नीति-निर्णय में सहायक प्रभाव के कारण इस दिन किए गए ज्ञानात्मक व धार्मिक प्रयास धनु राशि के पक्ष में काम कर सकते हैं।
टिप: यह सूची सामान्यीकृत है; किसी भी व्यक्तिगत नतीजे के लिये जन्म-कुंडली (लग्न, दशा, महादशा) आवश्यक है। स्थानीय पण्डित या प्रमाणित ज्योतिषी से समन्वय कर नतीजे को परखें।
अनुष्ठानिक और व्यवहारिक सुझाव (यदि संयोग बन रहा हो)
- सुबह के शुभ मुहूर्त और तिथि-पाँचांग की पुष्टि के बाद नित्य स्नान करके हनुमान चालीसा या संख्यात्मक (11/21/108) पाठ करें।
- हनुमान को सिंदूर, तेल, मोती, और फल-प्रसाद अर्पित करें—विशेषकर माँजरी (हल्दी-अभ्यंग) और गुड़ का दान करने से पारम्परिक लाभ बताया जाता है।
- नरक चतुर्दशी के अवसर पर घर की सफाई, दीयों का प्रज्वलन और पुराने कर्ज-निजी धारणाओं का त्याग करें; छोटे-छोटे दान (रोटी, कपड़ा, दीपक) कर आशा और सामाजिक कर्तव्य का निर्वाह करें।
- यदि किसी राशि को विशेष ज्योतिषीय ताव-तार की वजह से संकट कहा गया है, तो मंत्र, जप या उपवास के साथ-साथ व्यावहारिक कदम (कागजी काम, अदालत, कारोबार में पारदर्शिता) लेना जरूरी होगा—सिर्फ आध्यात्मिक उपाय पर निर्भर न रहें।
समाप्ति और सतर्कता
नरक चतुर्दशी पर हनुमान जयंती का संयोग आध्यात्मिक अर्थ में मजबूत संदेश देता है: भीतरी अँधकार का नाश और भक्ति-बल से जीवन के संकटों का सामना। तथापि, विशेष तिथियों के धार्मिक और ज्योतिषीय लाभ स्थान-निर्भर और व्यक्ति-निर्भर होते हैं। इसलिए अपने घरेलू पञ्चांग, स्थानीय मन्दिर अथवा प्रमाणित ज्योतिष से तिथियाँ, शुभ मुहूर्त और व्यक्तिगत उपाय अवश्य पुष्टि कर लें। अंततः, अनुशासन, दया और निष्ठा—ये गुण किसी भी तिथि को सार्थक बनाते हैं।