Diwali 2025: इस दिवाली घर लाएं ये 5 चीजें, साल भर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
दिवाली का त्योहार केवल रोशनी का महोत्सव नहीं, बल्कि गृह-आयु, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का अवसर भी माना जाता है। पारंपरिक रूप से कार्तिक मास की अमावस्या को देवी माँ लक्ष्मी की पूजा का प्रमुख समय माना जाता है, जो घर-परिवार में वैभव और सौभाग्य लाने के लिए अनुष्ठित की जाती है। अलग‑अलग परंपराओं में उपाय, सामग्री और विधि में भिन्नता होती है — स्मार्त, वैश्णव और शाक्त परंपराएँ अपने-अपने रीति-रिवाज निभाती हैं — इसलिए स्थानीय पञ्चांग और पारिवारिक प्रथाओं का सम्मान करना आवश्यक है। इस लेख में हम उन पाँच पारंपरिक और व्यवहारिक वस्तुओं पर ध्यान देंगे जिन्हें दिवाली पर घर में लाने से माँ लक्ष्मी की कृपा की प्रतीक्षा की जाती है। इन सुझावों के साथ मैं कुछ संस्कृतिक-संदर्भ और व्यवहारिक टिप्स भी साझा करूँगा ताकि पूजा सहज, सुरक्षित और अर्थपूर्ण हो।
1. माँ लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
पूजा के केन्द्र में अक्सर माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या सुंदर चित्र रहता है। कई घरों में गणेश‑चित्र भी रखा जाता है क्योंकि परंपरा के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश‑पूजन से होती है।
- विधि और सामग्री: मिट्टी, तांबा, पीतल या चायना वाली मूर्तियाँ प्रचलित हैं; कुछ दर्शनशास्त्रियों के अनुसार धातु या मिट्टी की मूर्ति स्वाभाविक और दीर्घकालिक होती है।
- स्थान: पूजा‑कक्ष या घर के उत्तर‑पश्चिम/पूर्व दिशा के पास साफ़, ऊँची चौकी पर रखें। वैस्टर्न (Vastu) और पारिवारिक प्रथाओं का ध्यान रखें।
- संदर्भ: पुराणों जैसे पद्म और स्कन्द में कार्तिक अमावस्या पर लक्ष्मी‑पूजन का उल्लेख मिलता है; साथ ही गृह्य सूतरों में भी पूजा‑शुद्धि का निर्देश रहता है।
2. दीप (दीये) — तेल या घी के लैंप
दीप पूजा का प्रतीक है: अज्ञान से ज्ञान की ओर, अँधकार से प्रकाश की ओर। वेदिक और उपनिषदिक परंपरा में प्रकाश का आध्यात्मिक महत्व बार‑बार मिलता है।
- किसे चुनें: घी के दीये पारंपरिक साहित्य में अधिक शुभ माने जाते हैं, पर शुद्ध तिल का तेल या सरसों का तेल भी प्रयोग होता है।
- सुरक्षा और संख्या: दीयों की संख्या पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करती है; मुख्य बात है नियमित और सुरक्षित रूप से प्रकाश देना — मुँह और रास्तों को रोशन रखें।
- रात्रि‑प्रवाह: रात भर घर के प्रवेश द्वार और आंगन में दीप जलाने की परंपरा है, जो मेहमान और सकारात्मक ऊर्जा के लिए खुला निमंत्रण समझी जाती है।
3. कलश/शुभ सामग्री और अनाज (अन्न) — समृद्धि का संकेत
ज्योतिषीय व वैदिक रीति में कलश (नवीन जल, आम के पत्ते/मोगरे, नारियल, सिक्के) को शुभ माना जाता है; यह समृद्धि, जीवन‑ऊर्जा और पृथ्वी‑उत्पन्न का प्रतीक है।
- कलश लगाना: छोटे तांबे/कांसे के कलश में जल भरें, ऊपर नारियल रखें और चारों ओर आम के पत्ते लगाएँ। इसमें कुछ लोग सिक्के या छोटी‑सी मूर्ति भी रखते हैं।
- अन्न का महत्व: अनाज (चावल, गेहूँ) को खोल कर रखने की परंपरा समृद्धि‑सूचक है; कुछ घरों में पूजा के बाद अन्न दान भी किया जाता है।
- वैचारिक संदर्भ: पुराणिक और गृह्यग्रंथों में कलश को सम्पूर्णता और जीवनस्राव का सूचक कहते हैं; इसे गृह में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
4. रंगोली/कोलम और साफ‑सफाई
अध्यात्मिक और सामाजिक दोनों अर्थों में सफाई महत्वपूर्ण है — घर की साफ‑सुथ्राई लक्ष्मी को आकर्षित करने का पहला कदम मानी जाती है। रंगोली या कोलम कमरे के द्वार पर स्वागत का चिन्ह है।
- सामग्री तथा डिज़ाइन: चावल का आटा, रंगीन पाउडर, हल्दी‑मिश्रित चावल आदि पारंपरिक हैं; सरल ज्यामितीय पैटर्न या परिवारिक प्रतीक भी बनाए जा सकते हैं।
- समावेशिता: दक्षिण और दक्षिण‑पूर्वी भारत में कोलम जाना‑पहचाना है, उत्तर में रंगोली; पर दोनों का उद्देश्य समान — स्वागत और सौभाग्य लाना — है।
- व्यावहारिक सुझाव: रंगोली के आसपास दीप रखें और रात में इसे सुरक्षित स्थान पर बनवाएँ ताकि चलने‑फिरने वालों के लिए समस्या न हो।
5. पुष्प, अगरबत्ती और प्रासाद (मिष्ठान्न)
ताजा पुष्प, खुशबू और नैवेद्य (प्रसाद) पूजा को पूर्ण बनाते हैं। विभिन्न परंपराएँ अलग‑अलग फलों और व्यंजनों को पसंद करती हैं — उदाहरण के लिए बंगाल में रोस्टेड चॉकलेट तरह के मिष्ठान, दक्षिण में नारियल‑मिष्टान आदि।
- फूल और खुशबू: माला के लिए सुझाव — गेंदा, गुलाब, चमेली या परिवारिक पसंद के स्थानीय फूल; कुछ परंपराएँ कम सुगंध वाले पुष्पों को प्राथमिकता देती हैं।
- प्रसाद बनाम दान: पूजा के बाद घर में प्रसाद बाँटना शुभ है; कई ग्रन्थ यह भी सुझाते हैं कि त्योहार पर अन्नदान या गरीबों को भोजन देना लक्ष्मी‑अनुग्रह बढ़ाता है।
- ध्यान देने योग्य बात: यदि किसी को किसी फूल/आहार से एलर्जी है तो वैकल्पिक सामग्री का प्रयोग करें; धार्मिक अनुष्ठान में स्वास्थ्य और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी नियम‑विधि।
निष्कर्ष: दिवाली पर ये पाँच वस्तुएँ — प्रतिमा/चित्र, दीप, कलश/अन्न, रंगोली और पुष्प‑प्रसाद — पारंपरिक रूप से शुभ मानी जाती हैं और घर में समृद्धि व सकारात्मकता के लिए उपयोगी साधन हैं। अलग‑अलग समुदायों में रीति‑रिवाज बदलते हैं; इसलिए स्थानीय पञ्चांग, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य‑सुरक्षा को ध्यान में रखकर निर्णय लें। अगर आप अधिक सटीक समय‑निर्देश (कार्तिक अमावस्या, शुभ मुहूर्त) जानना चाहते हैं तो अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पण्डित या पञ्चांग से परामर्श लेना उपयुक्त रहेगा। दिवाली से पहले मन और घर दोनों को साफ़ करके आप उस आध्यात्मिकता और सामूहिकता का अनुभव कर पाएँगे जो इस त्योहार की मूल भावना है।