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Diwali 2025: धनतेरस पर भूलकर भी न खरीदें ये वस्तुएं, हो सकता है अशुभ

Diwali 2025: धनतेरस पर भूलकर भी न खरीदें ये वस्तुएं, हो सकता है अशुभ

धनतेरस—जो धनत्रयोदशी के नाम से भी जानी जाती है—दीपावली पर्व की शुरुआत का पारंपरिक दिन है, जब घरों में देवी-देवताओं की पूजा के साथ नए सामान खरीदने की प्रथा रही है। पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक आर्थिक व्यवहार के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कई परिवारों के लिए यह दिन सोना‑चांदी, बर्तन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने का शुभ अवसर होता है; फिर भी कुछ वस्तुएँ ऐसी मानी जाती हैं जिन्हें खरीदने से बचना चाहिए—कभी‑कभी धार्मिक कारणों से, कभी सामाजिक‑आस्था से, और कभी नवसंकलन के अनुकूल न होने के व्यावहारिक कारणों से। नीचे दिए गए सुझाव सामान्य प्रथाओं और अलग‑अलग शैव, वैष्णव और साम्राज्यिक परंपरागत दृष्टिकोणों का सम्मान करते हुए तैयार किए गए हैं; स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा यह तय करने में निर्णायक होती है कि आप क्या खरीदें या न खरीदें।

किस तरह की वस्तुएँ भूलकर भी न खरीदें

  • टूटी‑फूटी या दोषपूर्ण सामान — जले हुए, टूटे या खराब माल को त्योहारी अवसर पर खरीदना शुभ नहीं माना जाता। नये साल/त्योहार के प्रतीक के रूप में खराब सामान लाने से पारंपरिक धारणा में अशुभता जुड़ी होती है।
  • दूसरे हाथ की पुरानी वस्तुएँ (जब तक प्रयोजन विशेष न हो) — कई घरों में विशेषकर पूजा के लिए प्रयुक्त होने वाली चीजें नई लेने का चलन है। उपयोग की गई मूर्तियाँ, ताबीज़ या पूजा‑सामग्री खरीदने से पहले स्रोत और शुद्धता की जाँच करें; कुछ परंपराएँ पुरानी पूजार्चित वस्तुओं को अस्वीकृत मानती हैं।
  • जानवरों से उत्पन्न कुछ उत्पाद—विशेषकर ताज़ी खाल/हड्डी — कई वैष्णव और शाक्त परंपराओं में ऐसे पदार्थों को पवित्र उत्सव के समय असंगत माना जाता है। लेदर‑आधारित सामान या ताज़े पशु उत्पन्नों के संबंध में क्षेत्रीय प्रथाएँ भिन्न हैं; अपने घरेलू रीति के अनुसार निर्णय लें।
  • खतरनाक/तेज़ चाकू, हथियार आदि (जब तक उपयोग‑लक्ष्य पवित्र न हो) — प्रतीकात्मक रूप से तेज वस्तुएँ द्वेष/विघ्न का संकेत दे सकती हैं; कई परिवार इन्हें त्यौहार पर खरीदने से रोकते हैं।
  • चिकित्सा‑उपकरण और दवाइयाँ — मतभेद है — कुछ ज्योतिषियों और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार बीमारियों से जुड़ी वस्तुएँ त्योहारी खरीदारी के लिए अशुभ मानी जा सकती हैं। वहीं, Dhanvantari की पूजा के संदर्भ में आयुर्वेद से जुड़ी वस्तुओं परंपरागत महिमा भी बताई जाती है; इसलिए स्थानीय परंपरा या पंचांग से परामर्श करें।
  • अप्राकृतिक या नकारात्मक प्रतीक वाले सजावटी आइटम — उदाहरण के लिए ऐसे आइटम जिन पर हनन‑विकार, मरण‑छवि आदि हैं; त्योहार के सकारात्मक, समृद्धि‑प्रधान अर्थ के अनुरूप वस्तुएँ चुनें।
  • औसत दर्जे का सोना‑चांदी/ज्वेलरी बिना प्रमाण पत्र के — वित्तीय और पारंपरिक कारण दोनों से असत्यापित धातु खरीदने से बचें; गुणवत्ता‑प्रमाण पत्र, वजन और शुद्धता की जाँच जरूरी है।

क्यों न खरीदें — अर्थ और परंपरा

  • रितु‑शुद्धि और पूजा‑शास्त्र — कुछ परंपराएँ त्योहारों को पवित्र मानती हैं; उन दिनों उपयोग या प्रदर्शन के लिए ‘शुद्ध’ मानी जाने वाली वस्तुएँ ही उपयुक्त मानी जाती हैं। यह प्रथा संस्कार और आर्य‑नैतिकता से जुड़ी रहती है।
  • ज्योतिषीय कारण — पंचांग और मुहूर्त की परंपरा बताती है कि किसी दिए गए तिथि‑काल में किन कामों का आरम्भ शुभ रहेगा। यदि खरीदारी उस मुहूर्त के अनुकूल नहीं है तो कुछ ज्योतिषी इसे लाभ‑विघ्न से जोड़ते हैं।
  • प्रतीकात्मक कारण — टूटे‑फटे सामान या रोग से जुड़ी वस्तुएँ प्रतीकात्मक रूप से अशुभ संकेत मानी जा सकती हैं; पूजा के समय सकारात्मक प्रतीकों का वर्चस्व रखा जाता है।
  • व्यवहारिक कारण — त्योहारी भीड़ में बेईमान विक्रेताओं से खराब माल मिलने का जोखिम बढ़ जाता है; इसलिए उच्च‑मूल्य या संवेदनशील सामान के लिए सचेत रहना विवेकसंगत है।

वैकल्पिक सुझाव और सुरक्षित विकल्प

  • सोना‑चांदी, शुभ धातु के छोटे गौहने और नए बर्तन—क़ेवल प्रमाणित और विज़िटेड दुकानों से लें।
  • घरेलू उपयोग की बिजली‑वस्तुएँ और उपकरण — वारंटी, रिटर्न पॉलिसी और सीरियल/गुणवत्ता सत्यापित करके खरीदें।
  • दीपक, नैवेद्य सामग्री, नई पुस्तकों और घरेलू सजावट — ये त्यौहार के अनुरूप और आमतौर पर अनुकूल माने जाते हैं।
  • दान और सेवा — कई पारंपरिक सूत्र धनतेरस पर दान को शुभ मानते हैं; यदि कुछ खरीदना अशुभ लगे तो दान या सेवा का विकल्प सकारात्मक रहेगा।

यदि गलती से आप अशुभ मानी जाने वाली वस्तु खरीद लेते हैं

  • स्थानीय परंपरा के अनुसार शुद्धिकरण करें — पानी, घी‑चावल से पूजा कराना या धार्मिक विधि अपनाना अनेक परिवारों में प्रयुक्त उपाय हैं।
  • यदि वस्तु दोषपूर्ण/पुरानी है और आप आर्थिक नुकसान से बचना चाहते हैं तो उसे वापस कर दें या व्यापार नीति के अनुसार एक्सचेंज कर लें।
  • कुछ परिवार दोष निवारण के लिए देवी‑दत्त प्रसाद देकर, दान करके या किसी पंडित/समुदाय के समक्ष संकल्प कर के भी समाधान करते हैं—यह प्रथा क्षेत्र और परंपरा पर निर्भर करती है।

क्षेत्रीय भिन्नताएँ और निष्कर्ष

धर्म‑परंपराएँ, ज्योतिषीय सलाह और घरेलू रीति‑रिवाज उत्तर भारत, दक्षिण भारत, पूर्व और पश्चिम में अलग‑अलग होती हैं। उदाहरण के लिए कुछ समुदायों में लेदर‑सामान पर विशेष रोक हो सकती है, तो कहीं Dhanvantari से जुड़ी मान्यताओं के कारण चिकित्सा‑संबंधी वस्तुओं में सकारात्मकता देखी जाती है। इसलिए अंतिम निर्णय के लिए अपने घर के संप्रदाय, स्थानीय पंडित या भरोसेमंद पंचांग से परामर्श करना सबसे व्यावहारिक और सम्मानजनक कदम होगा।

समाप्ति सुझाव: धनतेरस पर खरीदारी करते समय शुद्धता, गुणवत्ता और पारंपरिक विचारों का संतुलन रखें। नया लाना होगा तो ऐसा लें जो दीर्घकालिक उपयोग के लिए उत्तम हो—इससे न केवल आर्थिक बुद्धिमत्ता दिखाई देती है बल्कि परंपरा का सम्मान भी स्थापित रहता है।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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