Diwali 2025: गोवर्धन पूजा की सबसे सरल विधि, इस तरह करें अन्नकूट की तैयारी
दीवाली के बाद मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा न केवल श्रीकृष्ण की लीला का स्मरण है, बल्कि प्रकृति, गौ-सेवा और अन्न की कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सहज और मार्मिक अवसर भी है। पारंपरिक रूप से इस दिन घरों और मंदिरों में छोटे गोवर्धन पर्वत बनाकर उसके आगे ‘अन्नकूट’ यानी अनेक प्रकार के भोजन चढ़ाए जाते हैं। आधुनिक दिनचर्या में बहुत से लोग समय और संसाधनों के कारण बड़ी तैयारी नहीं कर पाते; फिर भी साधारण विधि से भी श्रद्धा और नियम का उचित पालन करके अन्नकूट की तैयारी की जा सकती है। नीचे दी गई सरल, चरण-दर-चरण विधि विशेष रूप से उन परिवारों के लिए है जो सीमित समय और सामग्री के साथ, शुद्धता और परंपरा दोनों का ध्यान रखते हुए गोवर्धन पूजा करना चाहते हैं। इसमें पारंपरिक संदर्भों का ध्यान रखा गया है, साथ ही क्षेत्रीय भेद और ग्रंथीय व्याख्याओं के अंतर का भी सम्मान किया गया है—स्थानीय पंचांग या पंडित से तिथि-पुष्टिकरण और परंपरा के अनुसार छोटे-मोटे परिवर्तन किए जा सकते हैं।
तिथि और समय — ध्यान देने योग्य बातें
आम बोलचाल में गोवर्धन पूजा दीवाली के अगले दिन मनाई जाती है; पर तिथि और तारिख क्षेत्र और ज्योतिषीय गणना के अनुसार बदल सकती है। इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग अथवा किसी विश्वसनीय पुजारी से तिथि (तिथि/नक्षत्र) की पुष्टि कर लें। कुछ समुदायों में गोवर्धन पूजा को कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिपदा के रूप में देखा जाता है; अन्य जगहों पर पारंपरिक रीति से अलग आयोजन होता है—यहां हम सामान्य, घर पर अपनाने योग्य विधि बता रहे हैं।
गोवर्धन का सरल प्रतिनिधि स्वरूप बनाना
- यदि आप पारंपरिक रूप अपनाना चाहते हैं तो साफ़ मिट्टी या गोबर से छोटा सा ‘पहाड़’ बनाएं; कई घरों में गोबर का उपयोग धूप-प्रसाद के बाद धोकर मिट्टी में मिलाया जाता है।
- यदि गोबर उपयोग में असुविधा हो तो एक लीची के आकार का तख्ता/थाली लें और उसमें सूखे चावल, गेहूं या फूलों की परत से ढंका गोल ढेर बनाकर गोवर्धन का प्रतीक तैयार करें।
- ऊपर से रंग-बिरंगे फूल, चावल/कुट्टे हुए अनाज और कतरा दूध/दही से अलंकरण करें।
सरल अन्नकूट — 6-8 व्यंजन (4–6 लोगों के लिए अनुमानित सामग्री)
- खिचड़ी — 1 कप चावल + 1/2 कप मूँग दाल, हल्का नमक, घी।
- पुरी — 2 कप आटा, लगभग 1/2 कप तेल तलने के लिए।
- आलू-टमाटर की सब्जी — 500 ग्राम आलू, 2 टमाटर, हल्का मसाला।
- दाल — 1 कप तूर या मूँग दाल, हल्का घी-तड़का।
- खीर — 1 लीटर दूध, 1/2 कप चावल, 3/4 कप चीनी।
- लड्डू/मिश्री वाला प्रसाद — 250 ग्राम गुड़/चीनी के साथ बेसन/नारियल के लड्डू (वैकल्पिक)।
- फल और भुने मखाना/नमकीन — कुछ ताजे फल व हल्का नाश्ता।
तैयारी और समय-नियोजन (प्रायोगिक)
- पूर्व संध्या: सूखे और मीठे पकवानों की सूखी सामग्री तैयार रखें (आटा, चावल, दालें, चीनी, घी)।
- पुजा के दिन सुबह: पहले गोवर्धन का स्वरूप और पूजा-स्थल तैयार करें; थाली, दीपक, आरती सामग्री और प्रसाद के बर्तन रखें।
- एक साथ किचन में काम बांट लें — एक व्यक्ति खिचड़ी और दाल पर धयान दे, दूसरा पीठे/पकवान जैसे पूरियों की तैयारी करे।
- खीर पकाने में 30–40 मिनट, खिचड़ी 20–25 मिनट, सब्जी और दाल 20–30 मिनट लेंगी; पूजा से 1–2 घंटे पहले शुरुआत करना सुविधाजनक रहता है।
पूजा-सम्मेलन (सरल क्रम)
- गोवर्धन का दर्शनीय रूप सजाकर उसके समक्ष दीपक और घी रखें।
- सबसे पहले हाथ-पैर धोकर, साफ वस्त्र पहनकर, छोटा शुद्धिकरण—गायको दूध/दही/घी अर्पण की परंपरा का पालन कर सकते हैं (स्थानीय रीति अनुसार)।
- साधारण चरणबद्ध प्राथना: ॐ गोवर्धनाय नमः जैसा संक्षिप्त नाम-जाप किया जा सकता है; साथ ही अपने क्षेत्र में प्रचलित गोवर्धन स्तोत्र या श्रीमद्भागवत के गोवर्धन-लीला अंश का पाठ कर सकते हैं (दशम स्कन्ध में गोवर्धन लीला का उल्लेख मिलता है—स्थानीय संस्करण देखें)।
- फिर अन्नकूट को गोवर्धन के चरणों पर वा सामने थालों में व्यवस्थित कर के अर्पित करें।
- आरती के बाद प्रसाद का वितरण करें—पहले घर के वरिष्ठ/अतिथि, फिर परिवार और बाद में जरूरतमंदों को दें।
स्वच्छता, सुरक्षा और पारिवारिक सहभागिता
- गोवर्धन के लिए यदि गोबर प्रयोग कर रहे हैं तो उससे पहले सुरक्षित, सूखा और साफ गोबर चुनें; बच्चों के लिए सीधे संपर्क सीमित रखें और पूजा क्षेत्र स्वच्छ रखें।
- खाना बनाते समय हाथ, बर्तन और केकची सर्वाधिक स्वच्छ रखें; प्रसाद वितरण से पहले एक बार गर्म करना उचित है—खासकर दाल/सब्जियों को।
- छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए बैठने-सुविधा और भोजन-प्रबंध पर ध्यान दें; यदि आप सार्वजनिक वितरण करते हैं तो पैकेजिंग और हैंड-हाइजीन का ध्यान रखें।
अर्थ और विविधताएँ — ग्रंथीय तथा क्षेत्रीय दृष्टि
धार्मिक ग्रंथों में गोवर्धन पूजा का सांस्कृतिक-आध्यात्मिक सन्दर्भ मिलता है—कृष्ण द्वारा वृन्दावन के लोगों को गोवर्धन पर्वत उठा कर प्रकृति की पूजा का पाठ पढ़ाया गया। विभिन्न परंपराएँ इस दिन गाय-नेपाल, अन्नदान और सामुदायिक भोज पर अधिक जोर देती हैं। कुछ वैष्णव ग्रंथ और भक्तिपंथ इसे विशेष रूप से श्रीकृष्ण की लीला के रूप में मानते हैं, जबकि ग्रामीण और गायी-पूजा पर आधरित समुदायों में गोवर्धन पूजा का अर्थ गौसेवा और कृषक-धर्म की स्मृति से जुड़ा रहता है। इनमें से कोई भी दृष्टिकोण पूर्णतः अनन्य नहीं—यहां बताई साधारण विधि इन्हीं भिन्नताओं का सम्मान करते हुए घर पर सहज रूप से पालन करने हेतु है।
अंतिम सुझाव
सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और सादगी: यदि संसाधन सीमित हों तो भी एक छोटा, स्वच्छ अन्नकूट और शांत मन से की गई प्रार्थना वही अर्थ देती है जो बड़े आयोजन से मिलता है। स्थानीय परंपरा, घर की परंपरा और उपलब्धता के अनुसार समायोजन करें और जहाँ संभव हो, अन्नदान या सामुदायिक प्रसाद से त्योहार का दायरा बढ़ाएँ।