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Diwali 2025: घर की सफाई में इन जगहों को न करें नजरअंदाज, यहीं होता है मां लक्ष्मी का वास

Diwali 2025: घर की सफाई में इन जगहों को न करें नजरअंदाज, यहीं होता है मां लक्ष्मी का वास

दीवाली सिर्फ दीप और मिठाइयों का त्योहार नहीं है; यह घर की नियमितता, शौच (śaucha) और आतिथ्य की भावना को फिर से स्थापित करने का समय भी है। परंपरागत धारणाओं में माँ लक्ष्मी का वास स्वच्छता, व्यवस्था और मन की तैयारियों से जुड़ा माना जाता है। कई परिवार दान‑दक्षिणा, दहन और पूजा के साथ-साथ घर की साफ़‑सफाई को भी त्योहार की मुख्य तैयारी मानते हैं। इस लेख में हम उन विशेष स्थानों और वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, पर जो घर के आर्थिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक नियमितीकरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। साथ ही हम व्यावहारिक सुझाव देंगे — कब, किस क्रम में और किन साधनों से साफ़ करें — और अलग‑अलग परंपराओं के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए बताते हैं कि किस प्रकार की मर्यादा और संवेदनशीलता रखनी चाहिए।

क्यों सफाई जरूरी मानी जाती है — आध्यात्मिक और व्यवहारिक कारण

परंपराओं में सफाई का अर्थ केवल भौतिक धूल मिट्टी हटाना नहीं है; यह भावनात्मक और सामाजिक व्यवस्थितता की ओर संकेत करता है। योग सूत्रों में शौच (śaucha) एक नीयम के रूप में आता है — आचरण और मन की निर्मलता का आधार। गृहस्थ धर्मशास्त्रों तथा लोक व्यवहार में साफ‑सफाई को समृद्धि का पूर्वापेक्षी माना जाता रहा है। व्यवहारिक तौर पर भी, अच्छी सफाई की वजह से कीट‑नाशक, खराबी और अव्यवस्था घटती हैं, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

नज़रअंदाज होने वाली प्रमुख जगहें — और क्या करें

  • मुख्य द्वार और दहलीज़ (threshold): द्वार पर धूल, मकड़ी के जाले और जूते‑मल के निशान अक्सर बच जाते हैं। रोज़ाना, या दीवाली से पहले, द्वार का बाहर और अंदर दोनों हिस्से ध्यान से झाड़ें‑पोछें; अगर संभव हो तो हल्के साबुन या नींबू‑पानी से धोकर सुखाएँ — यह स्वागत का स्थान है इसलिए साफ रखना लाभकारी माना जाता है।
  • पूजा‑कमरा और माला/घट स्थान: मूर्तियाँ, चौकी, दीप‑स्तम्भ के नीचे रखी धूल अक्सर छूट जाती है। प्रतिमाओं को कोमल कपड़े से पोछें, पुराने फूल हटाएँ, नैवेद्य की डिब्बियाँ व्यवस्थित करें; अगर मूर्ति टूटी हो तो स्थानीय पुजारी या मंदिर से सलाह लेकर विधिपूर्वक निस्तारण करें—विसर्जन/समुचित मुक्ति के नियम समुदाय अनुसार भिन्न होते हैं।
  • रसोई व भंडारण अलमारियाँ (Pantry): अनवसथा में पड़ा पुराने अनाज, बासी मसाले, कटे हुए पैकेट खरीद‑बीकार हटाएँ। अलमीरा की ऊपरी शेल्व्स, रसोई की दीवारों के पीछे और गैस के पीछे जमा तेल‑चिकनाई साफ करें—ये आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
  • कागज़ात, बही‑खाते और अलमारी (जैविक धन): पुरानी रसीदें, नहीं देखे गए बिल, पुराने कागज़ कई बार अनदेखे रह जाते हैं। आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित करें, गैरजरूरी कागज़ (निजी जानकारी मिटा कर) सुरक्षित तरीके से नष्ट करें। नकदी, गहने और मूल दस्तावेज़ अच्छी तरह साफ‑सुथरे स्थान में रखें; सुरक्षित अल्मारी या बैंक लॉकर का उपयोग सोचें।
  • छत के कोने और पंखे/प्रशंसक: सुबह‑सुबह या किसी साफ दिन पर पंखे, कुश्तियाँ, लाइट फिटिंग और छत के कोने की सफाई करें—ये धूल के बड़े स्रोत होते हैं जो लंबे समय में घर की साफगोई कम कर देते हैं।
  • बाथरूम और नालियों तक: इन जगहों को छूटना एक आम गलती है। केवल दिखने वाली सतह नहीं, बल्कि नल, टॉयलेट सीट के पीछे और ड्रेनेज लाइन भी जाँचे—स्वच्छता और सुगंध के लिए यह आवश्यक है।
  • खिड़कियाँ और खिड़की‑सिल (sills):खिड़की की रेलें, चारों ओर की जंग और धूल अक्सर अनदेखी रह जाती है; साफ खिड़की रोशनी बढ़ाती है जो प्रतीकात्मक रूप से ‘लक्ष्मी’ का स्वागत करने जैसा माना जाता है।

कब और कैसे साफ़ करें — क्रम, सामग्री और सुरक्षा

  • समय: पारंपरिक तौर पर घर की व्यापक सफाई धनतेरस के दिन या उसके पहले शुरू की जाती है और लक्ष्मी पूजा से पहले निष्पादित करनी चाहिए। आम तौर पर दीवाली का मुख्य अनुष्ठान कार्तिक अमावस्या (Kartika Amavasya) की शाम को होता है; तिथियाँ स्थानीय पंचांग के अनुसार देखें।
  • क्रम: ऊपर से नीचे की ओर काम करें — छत‑फैन से शुरू कर फर्नीचर, फिर फर्श; बाहर से अंदर की ओर झाड़ू लगा कर कूड़ा बाहर निकालें। बर्तन‑सामान पहले साफ कर लें और पूजा की वस्तुएं सबसे आखिर में तरल या सूखी पोछ के साथ रखें।
  • सामग्री: यदि संभव हो तो प्राकृतिक क्लीनर (नमक, नींबू, सिरके का हल्का घोल) अपनाएँ। मजबूत रसायन मिलाते समय सावधानी रखें—कभी भी Bleach और अमोनिया को साथ न मिलाएँ। दस्ताने पहनें, बच्चों और बुजुर्गों को जहरीले उत्पादों से दूर रखें।

पूजा‑सामग्री, टूटे‑पुराने सामान और उनका सम्मान

टूटी हुई मूर्तियों, गलत हालत में पड़े बर्तन या पुजारी वस्तुएँ दिखावटी निस्तारण नहीं होने चाहिए। कई समुदायों में इन्हें नम‑रोली में बहाकर या जमीन में दफन कर सम्मानपूर्वक निपटाने का प्रावधान है; कुछ स्थानीय मंदिर इन्हें स्वीकार भी करते हैं। गहने और पैसे से जुड़ी चीजें साफ कर सुरक्षित स्थान में रखें; अगर कोई वस्तु शुरू से ही बिगड़ी हुई हो तो उसे सिक्योर तरीके से (निजी जानकारी मिटा कर) त्यागें।

विविध परंपराओं का सम्मान और समकालीन व्यावहारिकता

Śaiva, Vaiṣṇava, Śākta और Smārta घरों में सफाई‑विधि, रंगोली आकृति, दीपों की व्यवस्था और नैवेद्य के ढंग में भिन्नता रहेगी। कुछ परिवार उत्तर या पूर्वमुखी प्रवेश को विशेष मानते हैं; कुछ अन्य घरों में रसोई का विशेष स्थान होता है। इन विविधताओं को स्वीकारते हुए, नीतिगत सलाह यह है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्थानीय पर्यावरण नियमों का पालन करें—समुदाय‑मानसिकता के साथ आधुनिक सुरक्षात्मक उपाय मिलाकर ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।

निष्कर्ष

दीवाली की सफाई केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आर्थिक व्यवस्था का एहसास है। द्वार, पूजा‑कोना, रसोई, दस्तावेज़ और नलिकाओं पर विशेष ध्यान देकर न केवल घर सच में स्वच्छ होगा, बल्कि त्योहार का स्वागत भी शांतचित्त और व्यवस्थित रूप से हो सकेगा। विविध परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं—इनका सम्मान करते हुए स्थानीय पुजारी या समुदाय की सलाह लेना समझदारी है। शौच, समर्पण और सतर्कता के साथ की गई तैयारी दीवाली के आध्यात्मिक अर्थ को भी गहरा करती है।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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