Diwali 2025: धनतेरस पर इन जगहों पर दीपक जलाना न भूलें, चमक उठेगी किस्मत
धनतेरस को पारंपरिक रूप से धन, स्वास्थ्य और शुभता के लिए आराधना का दिन माना जाता है। इस दिन दीपक जलाना केवल रीत-मर्यादा नहीं बल्कि प्रतीकात्मक आमंत्रण भी है — प्रकाश से अज्ञान व अभाव दूर हों और समृद्धि घर में प्रवेश करे। 2025 के धनतेरस के विशेष मुहूर्त और तिथि स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं; इसलिए पूजा और दीपक जलाने का शुद्ध समय देखने के लिए अपने नज़दीकी पंडित या भरोसेमंद पंचांग देखें। इस लेख में हम उन स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरागत व वैचारिक वजहें बताएंगे जहाँ दीपक रखने से प्रतीकात्मक रूप से कुल संपत्ति, घरेलू सौभाग्य और वैभव के आवाहन को बल मिलता है — साथ ही सुरक्षा, पर्यावरण और आधुनिक संदर्भों के लिए व्यावहारिक सुझाव भी देंगे। पढ़ते समय ध्यान रखें कि वेद, स्मृति और स्थानीय रीति-रिवाजों में विवेचनात्मक विविधता है; कुछ परंपराएँ विशिष्ट स्थानों या सामग्री पर अधिक ज़ोर देती हैं जबकि अन्य व्यापक दृष्टिकोण अपनाती हैं।
1. मुख्य द्वार और घर का द्वारमुख (प्रवेशद्वार)
मुख्य द्वार पर दीपक लगाने को सबसे अधिक शुभ माना जाता है। पारंपरिक मान्यता यह है कि लक्ष्मी—जो सौभाग्य व धन की देवी हैं—घर में प्रवेश द्वार से होती हुई आती हैं। दीपक द्वार पर रखने से प्रतीकात्मक रूप से द्वार प्रकाशमान होता है और अपशकुनों से रक्षा का भी संकेत मिलता है।
- विधि सुझाव: द्वार के दोनों ओर मिट्टी या तांबे के दीपक रखें; शाम के शुभ समय पर ज्वलित करें।
- वास्तु परिप्रेक्ष्य: उत्तर या ईशान्य (उत्तर-पूर्व) की ओर मुख वाला प्रवेश द्वार धन आकर्षण के लिए शुभ समझा जाता है।
2. पूजा स्थल या गृह-मंदिर
पूजाघर में दीपक जलाना अनिवार्य रूप से अनुष्ठान का केंद्र है। देवता-प्रतिमाओं के समक्ष दी गई रोशनी को ज्ञान-प्रकाश और ईश्वर से संपर्क का माध्यम माना जाता है।
- विधिक नोट: पूजा के दौरान दिये में घी का उपयोग करने की परंपरा कई समुदायों में पाई जाती है; हालांकि शास्त्रीय ग्रंथों में विभिन्न सामग्री का उल्लेख है और स्थानीयता के अनुसार तै किया जा सकता है।
- सावधानी: अगर घर में कागजात, किताबें व तिजोरी पास हैं तो उनसे दूरी बनाकर रखें ताकि आग का कोई खतरा न रहे।
3. तिजोरी, नकदी पेटी या कारोबारी दुकान का प्रवेश
धनतेरस धन-सम्बन्धी पूजा का दिन है; इसलिए तिजोरी, नकदी पेटी, बिलों और बही-खातों के पास दीपक रखना पारंपरिक तौर पर शुभ माना जाता है। व्यापारियों के लिए दुकान के द्वार पर दीपक जलाना नए साल की शुरुआत सामान्यतः समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
- नॉर्म्स: दीपक को लौ के साथ सीधे नकदी/कागजात के पास न रखें; सुरक्षित दूरी बनाकर प्रकाश रखें या इलेक्ट्रिक दीपक/लालटेन का विकल्प लें।
4. उत्तर या उत्तर-पूर्व कोना (कुबेर/ईशान्य स्थान)
वास्तु व कुबेर साधना के अनुसार उत्तर को धन का स्थान और उत्तर-पूर्व (ईशान्य) को सकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना गया है। दीपक इन कोनों में रखने से धन और सकारात्मक ऊर्जा का आवाहन होता है — यह परंपरा कई गृह-विधानों में मिलती है।
5. छत, बालकनी और घर के बाहरी हिस्से
छत या बालकनी पर दीपक जलाने से घर के ऊपर प्रकाश फैलता है और सामूहिक रोशनी का भाव बनता है। परंपरागत दीपोत्सव में घर के बाहर भी दीप लगाकर मोहल्ले-पड़ोस में मिलकर उजाला करने की प्रथा रही है।
- समुदायिक चेतावनी: खुले स्थान पर मेन-डेक पर रखते समय हवा व आग की सुरक्षा का ध्यान रखें; थर्मली टिकाऊ पात्र व जमीनी आधार का प्रयोग करें।
6. नए-सौदे, आभूषण या धातु वस्तुएँ जिनकी खरीद धनतेरस पर हुई हो
धनतेरस पर सोना, चाँदी या रसोई के नए बर्तन खरीदने की प्रथा रही है। इन्हें घर लाने के बाद दीपक जला कर अर्घ्य देना शुभ माना जाता है — यह नया वस्तु घर में समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है।
7. समाजिक व सार्वजनिक स्थान — मंदिर, दुकानें और कार्यालय
समुदाय के मंदिरों, बाजारों और कार्यालयों में भी दीपक जलाना सार्वजनिक शुभकामनाओं का संकेत है। कार्यालयों में मुख्य प्रवेश पर या प्रबंधन विभाग के पास दीपक लगाना कर्मचारियों के बीच सकारात्मक संदेश देता है।
आलौकिकता के साथ यथार्थवाद: सामग्री, संख्या और मुहूर्त
सामग्री: पारंपरिक रूप में मिट्टी, तांबे या कांसे के दीपक और घी की लौ को श्रेष्ठ माना गया है; परन्तु पर्यावरण व सुरक्षा कारणों से पुन:प्रयुक्त ताम्र/बांस के दीपक या एलईडी-दीपक भी स्वीकार्य विकल्प हैं।
संख्या: शास्त्र विशेष किसी निश्चित संख्या का अनिवार्य निर्देश नहीं देते; कई स्थानीय परंपराएँ विषम संख्या पसंद करती हैं। यहां सबसे महत्वपूर्ण है मन का भाव और शुद्ध नीयत।
मुहूर्त: धनतेरस की तिथि और शुभ समय (त्रयोदशी तिथि के शुभ पलों) क्षेत्रीय पंचांग पर निर्भर करते हैं; सर्वमान्य सुझाव है कि पूजा से पहले स्थानीय पंचांग देखें और आवश्यक हो तो पुरोहित से परामर्श लें।
सुरक्षा, पर्यावरण और समावेशिता
दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें—बच्चों व पालतू जानवरों से दूरी, ज्वलनशील सामग्री से दूर रखें। मिट्टी के दीयों के विकल्प में पुन:प्रयोग योग्य धातु के दीपक या सोलर/बैटरी संचालित दीप भी उपयोगी हैं। साथ ही, पड़ोस-समुदाय के साथ समन्वय कर सामूहिक दीप-प्रदर्शनी में शामिल होकर त्योहार को साझा करें; इससे सामाजिक सौहार्द भी बढ़ता है।
निष्कर्ष
धनतेरस पर दीपक जलाना एक पुरातन सामाजिक व धार्मिक परम्परा है जो धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य के प्रतीक को आमंत्रित करती है। पारंपरिक निर्देश—मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तिजोरी तथा उत्तर/ईशान्य कोनों पर दीपक — का पालन करने से प्रतीकात्मक रूप से शुभता बढ़ती है; परंतु सटीक मुहूर्त व रीति-रिवाज स्थानीय परंपराओं और पंचांग पर निर्भर होते हैं। शालीनता, सुरक्षा और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए दीपक जलाना इस त्योहार को अर्थपूर्ण व सुरक्षित बनाएगा।