Diwali 2025: पटाखों से होने वाले प्रदूषण से कैसे बचें? अपनाएं ये घरेलू उपाय
दिवाली का त्योहार हमारे घरों और दिलों में उजाला भरता है — परिवार के साथ मिलना, दीपक जलाना, मीठा बाँटना और नए वर्ष के लिए शुभकामनाएँ देना। परंतु पटाखों से निकलने वाला धुआँ और शोर कई लोगों के लिए चिंता का विषय भी बन चुका है: बच्चों और बुजुर्गों की सांस में परेशानी, अस्थमा के रोगियों का बिगड़ना, पालतू जानवरों का आतंक और वातावरण में कण प्रदूषण का बढ़ना। विविध धर्मपरंपराओं में दिवाली की आध्यात्मिकता अलग-अलग रूपों में प्रकट होती है — वैष्णव परंपराओं में लक्ष्मी-पूजा, शाक्त परंपराओं में देवी आराधना, स्मार्त परंपराओं में गृह-पूजा और सामुदायिक अनुष्ठान — पर सभी में प्रकाश की प्रतीकात्मकता समान रहती है। इस लेख में हम व्यवहारिक घरेलू उपाय बताएँगे जिनसे आप दिवाली की खुशियाँ बनाए रखकर पटाखों से होने वाले प्रदूषण और जोखिमों को कम कर सकें, साथ ही धार्मिक संवेदनशीलता का ख्याल रखते हुए वैकल्पिक, सुरक्षित और सामूहिक रूप से लाभकारी अभ्यासों का सुझाव देंगे।
## पटाखों के जोखिम समझें — छोटा, पर असरदार
– **वायु प्रदूषण:** पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण (PM2.5/PM10) फेफड़ों और हृदय पर असर डालते हैं। अस्थमा और हृदय-रोग वाले लोग प्रभावित होते हैं।
– **शोर प्रदूषण:** जोरदार धमाके बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों के लिए तनावजनक होते हैं; कई मंदिर और मठ भी सांगीतिक/आध्यात्मिक वातावरण के लिए शांत स्थान होते हैं।
– **आग और दुर्घटना का जोखिम:** घर पर अनियंत्रित पटाखे आग के मामलों और आंखों/त्वचा को चोट पहुँचाने के कारण बन सकते हैं।
– **पर्यावरणीय अपशिष्ट:** जलने के बाद बची राख और केमिकल अवशेष मिट्टी और पानी को दूषित कर सकते हैं।
## घरेलू उपाय — सुरक्षित और मापा हुआ दृष्टिकोण
**योजना और सीमाएँ तय करें**
– उत्सव से पहले परिवार के साथ तय कर लें कि पटाखों का कितना और कब इस्तेमाल होगा — इसे सीमित समय-ब्लॉक (उदा. संध्या में छोटा सा समय) रखें ताकि प्रदूषण सीमित रहे और पड़ोस की सुविधा बनी रहे। स्थानीय शोर/आग से संबंधित नियमों का पालन अनिवार्य मानें।
– यदि घर में अस्थमा, COPD, या हृदय-रोग के मरीज हों तो पटाखों से पूरी तरह परहेज़ करें और पड़ोसियों को भी विनम्रता से बताएं।
**कम-प्रदूषित विकल्प अपनाएँ**
– **दीये और LED लाइट्स:** मिट्टी के दीये, मोमबत्तियाँ या ऊर्जा-कुशल LED लाइट्स का इस्तेमाल करें। प्रकाश की आध्यात्मिक परंपरा में दीयों की भूमिका अक्सर प्रमुख है — इस अर्थ को बनाए रखते हुए पटाखों पर निर्भरता घटाएँ।
– **कम-धुएँ वाले (green) पटाखे:** अगर पटाखे ज़रूरी हों तो मानक वाले कम-धुएँ वाले उत्पाद चुनें, पर समझें कि ये भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं होते।
– **समुदाय-आधारित आतिशबाज़ी:** व्यक्तिगत स्तर पर छोटे-छोटे पटाखे जलाने के बजाय सामुदायिक आयोजन में सीमित, व्यवस्थित आतिशबाज़ी करें जिससे कुल उत्सर्जन कम और नियंत्रण बेहतर होगा।
**सुरक्षा और स्वच्छता के व्यावहारिक कदम**
– पटाखे जलाते समय बच्चों को दूर रखें; हमेशा बाल सुरक्षा चश्मा और मोटी दस्ताने रखें।
– पास में पानी का बर्तन, फोर्टेबल बकेट और अग्निशमन उपकरण रखें। उपयोग के बाद बची राख को पानी में भिगोकर सुरक्षित तरीके से डिस्पोज करें।
– पटाखे जलाते समय सूखे कपड़े, पेड़ों या ज्वलनशील पदार्थों से दूरी रखें।
– उपयोग के बाद कमरे व घर की अच्छी तरह वेंटिलेशन करें — दरवाज़े/खिड़कियाँ खोलकर और हवा चलाने से अंदर का धुआँ बाहर निकलता है।
## स्वास्थ्य के लिए तत्काल और निरंतर उपाय
– सांस संबंधी संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए **N95/N99 मास्क** बाजार में उपलब्ध बेहतर विकल्प हैं; सामान्य कपड़े के मास्क की तुलना में ये सूक्ष्म कणों को बेहतर रोकते हैं।
– अस्थमा या हृदय रोग वाले लोग अपने दवाओं (इन्हेलर, निट्रोग्लिसरीन आदि) त्योहार से पहले सुनिश्चित रखें और चिकित्सक से सलाह लें।
– घर के अंदर **HEPA फिल्टर** या एयर प्यूरीफायर रखें — त्योहार के बाद भी कुछ दिन तक चलाने से घर के अंदर कण स्तर घटता है।
– सफाई के लिए सूखी झाड़ू के बजाय **गीला पोछा** एवं नमी से साफ करने की सलाह दें ताकि जमी हुई राख उड़कर सांस में न जाए।
## आध्यात्मिक और सामुदायिक विकल्प — परंपरा का सम्मान करते हुए नवतन
– दीपक-प्रदान का समुदायिक आयोजन रखें — एक बड़ी रैली/दीपोत्सव जहां व्यक्तिगत पटाखों की जगह सामूहिक प्रकाश पर जोर हो। कई वैदिक परंपराओं में सामूहिक पूजन और स्तोत्रों का पाठ पारंपरिक रहा है; इसे आज के परिप्रेक्ष्य में शोर और प्रदूषण घटाने का अवसर बनाइए।
– दान और सेवा को उत्सव का केंद्र बनाइए — जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और शिक्षण सामग्री देकर पारंपरिक अर्थ में ‘लक्ष्मी’ का स्वागत करें। कई धर्मशास्त्रीय व्याख्याओं में दान और अहिंसा को भी दिवाली के मूल भाव का हिस्सा माना जाता है।
– बच्चों को पढ़ाएँ कि दीप का अर्थ अंदर के अज्ञान पर प्रकाश डालना है — पटाखों की बजाय दीपक, कथा-आत्म चिन्तन और पारिवारिक सामंजस्य को महत्वपूर्ण समझाएँ।
## निष्कर्ष — संतुलन का मार्ग
दिवाली का धार्मिक और सांस्कृतिक सार प्रकाश और मिलन है। **पर्यावरण और स्वास्थ्य की चिंताओं को नजरअंदाज किए बिना** हम परंपरा और आधुनिक जिम्मेदारी का संतुलन बना सकते हैं। छोटे-छोटे घरेलू उपाय — सीमित और नियोजित पटाखा उपयोग, सुरक्षित विकल्प, मास्क/प्यूरीफायर का उपयोग, सामुदायिक आयोजनों को प्राथमिकता — मिलकर वह योगदान देते हैं जिससे न केवल हमारे घर, बल्कि समाज और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। त्योहार की खुशियाँ मनाइए, पर यह भी याद रखिए कि पारंपरिक सम्मान और अहिंसा की भावना ही दीवाली की सबसे बड़ी विरासत है।