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Diwali 2025: भाई दूज पर बहनें इस शुभ मुहूर्त में करें भाई का तिलक, बढ़ेगी उम्र और सौभाग्य

Diwali 2025: भाई दूज पर बहनें इस शुभ मुहूर्त में करें भाई का तिलक, बढ़ेगी उम्र और सौभाग्य

इंट्रो: भाई दूज—दीपावली के बाद का वह पवित्र दिन है जब बहनें अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक करके, उन्हें दीया दिखाकर और भोग भोजन कराकर दीर्घायु, सुख और सौभाग्य की कामना करती हैं। यह परंपरा न केवल पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है बल्कि सामाजिक और धार्मिक अर्थों में भी महत्वपूर्ण है: भाई–बहन के धर्म, रक्षा और पारस्परिक कर्तव्यों का स्मरण। हर समुदाय और प्रदेश में इसकी रूप-रेखा, नाम और विधि भिन्न हो सकती है—बंगाल में भइया-फोन्ता, महाराष्ट्र में भाऊबीज, नेपाल में भाईटिका—फिर भी मूल भाव समान रहता है। 2025 के भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त चुनते समय तिथि (कार्तिक शुक्ल द्वितीया), स्थानीय पंचांग और कुछ सामान्य मुहूर्त-नियमों का ध्यान रखना श्रेष्ठ रहेगा; साथ ही, मनोभाव—भाई की सुरक्षा और कल्याण के लिए सच्ची श्रद्धा—सबसे महत्वपूर्ण है।

परंपरा और धार्मिक संदर्भ

लोककथाओं में भाई दूज का सम्बन्ध मुख्यतः यम और यमुना की कथा से जुड़ा मिलता है: कहा जाता है कि Yama (यमराज) अपनी बहन Yamuna (यमुना) के घर आए, उन्होंने तिलक, भोजन और सत्कार किया; यमराज ने अपनी बहन को आशीर्वाद देकर कहा कि यह अवसर सभी बहनों के लिए भाई की रक्षा की स्मृति बने। कुछ क्षेत्रीय ग्रन्थों और लोककथाओं में यह संकेत मिलता है कि यह पर्व बहन के द्वारा भाई की दीर्घायु और समृद्धि की कामना का प्रतीक है। विभिन्न संवेदनशील धार्मिक परंपराएँ—श्रद्धालु वैदिक रीति, शाक्त, वैष्णव या स्थानीय रीति—इस दिन अलग-अलग भजन, मंत्र और आकार अपनाती हैं; इन विविधताओं का आदर करना चाहिए।

तिथि और महत्त्वपूर्ण पहलू — कैसे सुनिश्चित करें कि तिलक शुभ काल में हो

  • तिथि: भाई दूज पारंपरिक रूप से कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया (Yamadvitiya) पर पड़ती है। यह तिथि सनातन पंचांग के अनुसार गणना की जाती है।
  • स्थानीय पंचांग का प्रयोग: तिथि और मुहूर्त स्थान (longitude) और स्थानिक समय पर निर्भर करते हैं। इसलिए किसी भी विशेष समय को निश्चित करने के लिए अपने शहर का पंचांग देखें या स्थानीय पुजारी/ज्योतिष से परामर्श लें।
  • राहुकाल व अन्य निषिद्ध काल: सामान्य रूप से राहुकाल, गुलिक/यमगण्ड जैसे निषिद्ध कालों में तिलक न करें। अगर द्वितीया तिथि इन कालों में ही उपलब्ध हो, तो पंडित से वैकल्पिक शुभ काल पूछें।
  • तिथि की समाप्ति/प्रारम्भ: यदि द्वितीया तिथि रात में प्रारम्भ हो या खत्म हो, तो वही समय चुनें जिसमें तिथि स्थायी रूप से लागू हो—पंचांग में “तिथि प्रारम्भ/अवसान” देने होते हैं, उन्हें देखें।
  • आस्था और परिस्थिति: कई पारंपरिक गृहकर्मों की तरह यहाँ भी सही मन और निष्ठा का विशेष महत्व है—यदि पंचांग के सतेक शुभ काल उपलब्ध न हों तो सुबह के समय जब परिवार साथ हो, साधारण, साफ मुहूर्त में भी तिलक प्रभावी माना जाता है।

साधारण रूप से अपनाई जाने वाली विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)

  • साफ-सफाई: बहन पूजा-स्‍थल और अपने हाथ चेहरे को अच्छी तरह साफ करे।
  • सामग्री: रोली/कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्का तिलक देने का थाली, दियो/दीप, मिठाई/भोग।
  • आरती/प्रार्थना: दीप जलाकर भाई के मस्तक पर रोली से तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और छोटा सा प्रसाद देकर भोग कराएं।
  • संक्षिप्त आशीर्वाद व वचन: बहन साधारण शब्दों में आशीर्वाद दे सकती है — “भाई, तुम्हारी आयु और सौभाग्य बढ़े; जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे।”
  • ऐच्छिक मंत्र/प्रार्थना: आपके पारिवारिक रीति के अनुसार कोई संक्षिप्त प्रार्थना या यम-सम्बन्धी श्लोक पढ़ा जा सकता है; विचारशील विकल्पों में «ॐ यमाय नमः» जैसी पारंपरिक संबोधन शामिल हो सकते हैं।

कहां सावधानी बरतें — क्या न करें

  • तिथि का ध्यान न रखते हुए बिना पंचांग के कठोर निर्णय न लें—यदि द्वितीया तिथि उपस्थित न हो तो तिलक करने से पहले सलाह लें।
  • राहुकाल और अन्य निषिद्ध काल में पूजा-कार्य न करें।
  • अत्यधिक अनुशासनात्मक नियमों के दबाव में रिश्तों को ठेस पहुँचाने से बचें—पारिवारिक मेलजोल और स्नेह प्राथमिकता रखें।

क्षेत्रीय भिन्नताएँ और आधुनिक संदर्भ

देश के विभिन्न हिस्सों में भाई दूज की विधियाँ अलग-अलग हैं: कुछ स्थानों पर बहनें विशेष पकवान बनाती हैं, कहीं भाई बहन को उपहार देते हैं, तो कहीं पवित्र स्नान या व्रत भी आता है। नेपाल में तिहार के दौरान भाई-बहिन के बीच भाई-टिका एक विस्तृत परंपरा है। आधुनिक समय में शहरों में लोग सुबह या शाम जब परिवार एकत्र हो उसी समय तिलक कर लेते हैं; कई परिवार पंचांग के शुद्धि पर विश्वास रखते हुए भी व्यावहारिकता के आधार पर तिथि-सुविधा का संतुलन करते हैं।

निष्कर्ष और सुझाव

भाई दूज का तिलक—चाहे पारंपरिक शुभ मुहूर्त में हो या परिवार के अनुकूल समय में—मूलतः भाई-बहन के बीच स्नेह, सुरक्षा और कल्याण की कामना है। 2025 में कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दौरान तिलक करने के लिये सबसे सुरक्षित मार्ग यह है कि आप अपने स्थानीय पंचांग की जाँच करें या अनुभवी पंडित/ज्योतिषी से स्थानिक मुहूर्त पूछें। परंपरा का पालन करते हुए भी सरलता, साफ़-सफाई और सच्ची श्रद्धा रखें—क्योंकि धर्म में मनोभाव और परस्पर आदर ही अंतिम महत्व रखते हैं।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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