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Diwali 2025 Vastu: दिवाली से पहले घर से तुरंत हटा दें ये 5 अशुभ चीजें, नहीं तो रुक जाएगी तरक्की, वास्तु शास्त्री से जानें उपाय

Diwali 2025 Vastu: दिवाली से पहले घर से तुरंत हटा दें ये 5 अशुभ चीजें, नहीं तो रुक जाएगी तरक्की, वास्तु शास्त्री से जानें उपाय

दीपावली आने से पहले घर की सफाई और व्यवस्था का चलन पुराना है — यह सिर्फ़ सामाजिक तैयारी नहीं बल्कि कई पारम्परिक ग्रन्थों और वास्तु परंपराओं में शुभ ऊर्जा को आमंत्रित करने का साधन माना जाता रहा है। हालांकि अलग‑अलग समुदायों और आयुशास्त्रीय मतों में कुछ भिन्नताएँ हैं, परन्तु वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो दीर्घकाल में घर में ऊर्जा का प्रवाह बाधित कर सकती हैं। नीचे दिए गए पाँच सामानों को दीपावली से पहले हटाने की सलाह वास्तु विशेषज्ञ अक्सर देते हैं—हर वस्तु के पीछे शास्त्रीय कारण, त्वरित व्यावहारिक उपाय और वैकल्पिक धार्मिक/सांस्कृतिक सुझाव भी दिए गए हैं ताकि आप तर्कसंगत और सम्मानजनक तरीके से तैयारी कर सकें।

  • 1) टूटी‑फूटी मूर्तियाँ, कटोरी‑दीया और क्षतिग्रस्त पूजा‑सामान

    वास्तु और पूजा परंपरा दोनों में ही पूजा‑स्थल की पवित्रता अहम है। फटी हुई मूर्ति, टूटा दिया या पुराना टूट‑फूट वाला पवित्र सामान नकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि यह श्रद्धा और समुचित आराधना में बाधा डाल सकता है।

    उपाय: क्षतिग्रस्त मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विसर्जन या नष्ट करने की प्राथमिक पद्धति अपनाएं—यदि स्थानीय परंपरा ऐसा नहीं कहती तो बंद पॉलीथीन में बाँधकर बाहर रखें या किसी पंडित से परामर्श लें। नए या मरम्मत किये मूर्तिओं का प्रयोग करें। पूजा‑थान को दीपावली से कम से कम एक दिन पहले साफ़ कर लें और प्रतिमाएँ स्पष्ट प्रकाश में रखें।

  • 2) दरारें और पानी के रिसाव (दीवार, छत, नलियाँ)

    वास्तुशास्त्र में संरचनात्मक दोष—खासकर उत्तर‑पूर्व (ईशान) और उत्तर‑पश्चिम क्षेत्रों में दरारें और पानी का ठहराव—धन और स्वास्थ्य पर असर डालने के संकेत माने जाते हैं। स्थायी नमी या रिसाव नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकती है।

    उपाय: रिसावों की मरम्मत तुरंत कराएँ। दीवाल की दरारें भरवाएँ, छप्पर/नालियों की जाँच कराएं और नमी न रहने दें। अस्थायी तौर पर प्रदूषक और नमी सोखने के लिए कोठरी में सेंधा नमक रखें (दो‑तीन दिन), पर यह स्थायी समाधान नहीं है। अगर बड़ी संरचनात्मक समस्या है तो वास्तु विशेषज्ञ और इन्जीनियर की सलाह लें।

  • 3) सूखे या मृत पौधे और गंदे गमले

    जीवंत पौधे घर में सकारात्मक ऊर्जा और जीवनशक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। सूखे या मुरझाये पौधे विश्वास के अनुसार उर्जा के अवरोध बन जाते हैं और सौंदर्य व स्वच्छता भी घटाते हैं।

    उपाय: मुरझाये पौधों को बदलकर ताजे, स्वस्थ पौधे लगाएँ। तुलसी का पौधा पारम्परिक रूप से घर की सफाई और स्वास्थ्य के लिए शुभ माना जाता है — पर स्थानीय परंपरा के अनुरूप रखें। गमलों को धूल‑मुक्त और अच्छे नाली के साथ रखें ताकि पानी जमा न हो।

  • 4) घर में जमा कचरा, पुरानी वस्तुएँ और अव्यवस्था

    भौतिक अव्यवस्था (कपड़े, अखबार, पुराने बिल, टूटी वस्तुएँ) ऊर्जा के प्रवाह को रोकती है—वास्तुशास्त्र में साफ‑सफाई और वस्तुओं का सुव्यवस्थित होना आत्मिक और आर्थिक दोनों प्रकार की समृद्धि के साथ जोड़ा जाता है।

    उपाय: दीर्घकालीन उपयोग न होने वाली चीज़ों का दान या निस्सारण करें। कपड़ों और बर्तन‑सामान को वर्गीकृत कर रखें—जो उपयोग हों उन्हें साफ करके स्थान दें। मुख्य द्वार, प्रवेश‑ताल, पूजा‑कक्ष और रसोई को विशेष रूप से खुला‑साफ रखें। कई परिवार Dhanteras पर ही इन गतिविधियों को परंपरागत तौर पर करते हैं—हालाँकि सटीक तिथि के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

  • 5) टूटे हुए शीशे/आईने और खराब रोशन‑बत्तियाँ

    आइने और शीशे का वास्तु में विशेष महत्व है—दरारदार या संकुचित‑दरवाज़े वाले शीशे ऊर्जा को विकृत कर सकते हैं। घर में अंधेरे कोने और टूटी रोशनी भी नकारात्मक भाव बनाए रखते हैं।

    उपाय: फटे/दरार वाले शीशों को बदलें। पूजा या मुख्य कक्ष में प्रतिदिन पर्याप्त प्रकाश रखें—दीपावली के समय घर के कोनों में छोटे दीये/एलईडी रखें ताकि ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। टूटे हुए शीशों को जिम्मेदारी से निपटायें; यदि धार्मिक परंपरा कहे तो परम्परागत तरीके से विसर्जन या विधि अनुसार व्यवस्थित करें।

तत्काल करने योग्य सामान्य उपाय (संक्षेप में):

  • घरों की सफाई और खिड़कियों‑दरवाज़ों की मरम्मत दीपावली से कम से कम 2–3 दिन पहले पूरी कर लें।
  • पूजा‑ठान को शुद्ध जल (गंगा जल जहाँ प्रचलित हो) से छिड़कें और कच्चे तेल के दीपक से प्रकाश रखें—पर आग सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • अतिरिक्त सामान दान में दें; दान पंचांग की सलाह के साथ करना ठीक रहता है।
  • विस्तृत वास्तु परामर्श के लिए किसी प्रमाणित वास्तुशास्त्री से मिलें—विशेषकर यदि संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता हो।

नोट: वास्तुशास्त्र के विभिन्न स्कूलों (परंपरागत, समकालीन, क्षेत्रीय) में मतभेद होते हैं—कुछ सुझाव रीतियों और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इसलिए पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंडित/वास्तु विशेषज्ञ की सलाह के साथ उपर्युक्त उपाय अपनाएँ। यदि आप विशेष तिथियों (जैसे Dhanteras, Naraka Chaturdashi, Lakshmi Puja) के संबंध में सटीक मुहूर्त जानना चाहते हैं तो स्थानीय पंचांग देखें या योग्य ज्योतिष/पंडित से सलाह लें। दीपावली की तैयारी में साफ‑सफाई, मरम्मत और निस्पृह दान सबसे सरल और प्रभावी कदम होते हैं—यह न केवल वास्तु के अनुरूप है बल्कि सांस्कृतिक और मानसिक स्वच्छता का भी प्रतिरूप है।

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About G S Sachin

I am a passionate writer and researcher exploring the rich heritage of India’s festivals, temples, and spiritual traditions. Through my words, I strive to simplify complex rituals, uncover hidden meanings, and share timeless wisdom in a way that inspires curiosity and devotion. My writings blend storytelling with spirituality, helping readers connect with Hindu beliefs, yoga practices, and the cultural roots that continue to guide our lives today. When I’m not writing, I spend time visiting temples, reading scriptures, and engaging in conversations that deepen my understanding of India’s spiritual legacy. My goal is to make every article on Padmabuja.com a journey of discovery for the mind and soul.

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